आजादी की लड़ाई के गुमनाम नायक को मिला सम्मान, योगी ने किया मसुरियादीन पासी की प्रतिमा का अनावरण

राहुल गांधी पर योगी का तीखा हमला, बोले- आजादी की लड़ाई में नेहरू ही नहीं, मसुरियादीन पासी ने भी काटी थी जेल


प्रयागराज में स्वतंत्रता सेनानी महाशय मसुरियादीन पासी की प्रतिमा का अनावरण, चौराहे और संस्था का नाम उनके नाम पर रखने की पहल

प्रयागराज (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को प्रयागराज के तेलियरगंज चौराहे पर स्वतंत्रता सेनानी महाशय मसुरियादीन पासी की प्रतिमा का अनावरण कर उनके योगदान को याद किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में केवल जवाहरलाल नेहरू ही नहीं, बल्कि महाशय मसुरियादीन पासी जैसे स्वतंत्रता सेनानियों ने भी जेल की यातनाएं झेली थीं। उन्होंने कहा कि ऐसे महापुरुषों के संघर्ष और बलिदान को इतिहास में उचित स्थान मिलना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी उनके योगदान से परिचित हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि मसुरियादीन पासी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कई वर्ष जेल में बिताए। जेल से रिहा होने के बाद भी उन्होंने समाज को जागरूक करने का अभियान जारी रखा। उनके जीवन का संघर्ष इस बात का उदाहरण है कि देश की आजादी और सामाजिक सम्मान की लड़ाई में अनेक ऐसे लोगों ने योगदान दिया, जिनकी चर्चा अपेक्षाकृत कम हुई। कार्यक्रम के दौरान योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज के महापौर से तेलियरगंज स्थित चौराहे का नाम महाशय मसुरियादीन पासी के नाम पर रखने के लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि प्रयागराज की किसी प्रतिष्ठित संस्था का नाम उनके नाम पर रखने की पहल की जाएगी और वहां उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि महापुरुषों को सम्मान देना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि समाज को अपनी ऐतिहासिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। मुख्यमंत्री के अनुसार, महाशय मसुरियादीन पासी का जन्म 2 अक्टूबर 1911 को हुआ था। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के साथ सामाजिक अधिकारों के लिए भी आवाज उठाई। योगी ने कहा कि लंबे समय तक ऐसे अनेक व्यक्तित्वों को अपेक्षित पहचान नहीं मिल सकी, लेकिन उनकी सरकार ऐतिहासिक विरासत और महापुरुषों के योगदान को सामने लाने का प्रयास कर रही है। योगी आदित्यनाथ ने मसुरियादीन पासी के राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए बताया कि वह वर्ष 1946 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य बने थे। इसके बाद 1952 से 1972 के बीच चार बार संसद के लिए चुने गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद शुरुआती संसदीय दौर में जवाहरलाल नेहरू और मसुरियादीन पासी एक साथ संसद पहुंचे थे। उन्होंने अंग्रेजों के उस जरायम पेशा कानून का विरोध किया, जिसके कारण कई समुदायों को सामाजिक भेदभाव और अपमान का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री ने बताया कि अंग्रेजी शासन ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद वर्ष 1871 में जरायम पेशा कानून लागू किया था। इस कानून के तहत कई समुदायों को अपराध से जोड़कर देखा जाता था, जिससे उनके सामाजिक जीवन और सम्मान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। योगी ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर और महाशय मसुरियादीन पासी सहित कई लोगों ने इस अन्यायपूर्ण व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई। इस कानून के समाप्त होने के बाद प्रभावित समुदायों को सामाजिक सम्मान और अधिकारों की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला। मुख्यमंत्री ने पासी समाज के ऐतिहासिक योगदान का जिक्र करते हुए महाराजा बिजली पासी, वीर मक्का पासी और वीरांगना ऊदा देवी के साहस को भी याद किया। उन्होंने कहा कि महाराजा बिजली पासी ने लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में किलों का निर्माण कराया था, जबकि ऊदा देवी ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष में अदम्य वीरता का परिचय दिया। ऐसे वीरों की गाथाएं देश के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार लखनऊ में महाराजा बिजली पासी के किले के पुनरुद्धार का काम करा चुकी है। वहीं, वीरांगना ऊदा देवी के नाम पर पीएसी बटालियन गठित करने और उनकी अश्वारोही प्रतिमा स्थापित करने की पहल भी की जा रही है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि समाज और राष्ट्र के लिए योगदान देने वाले महापुरुषों का सम्मान किसी परिवार, वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनके विचारों और संघर्षों को व्यापक सामाजिक पहचान मिलनी चाहिए। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, नंद गोपाल गुप्ता नंदी, प्रयागराज के महापौर उमेश चंद्र गणेश केसरवानी और फूलपुर के सांसद प्रवीण पटेल समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी, पीयूष रंजन निषाद, वाचस्पति पासी, दीपक पटेल और गुरु प्रसाद मौर्य ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस अवसर पर महाशय मसुरियादीन पासी की पुत्री कमला कुमारी और उनके पौत्र सचिन कुमार भी उपस्थित रहे। प्रतिमा अनावरण के इस कार्यक्रम ने एक बार फिर इतिहास में कम चर्चित रहे स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को सामने लाने की जरूरत पर ध्यान खींचा। आजादी की लड़ाई केवल कुछ बड़े नामों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें अलग-अलग वर्गों, समुदायों और क्षेत्रों के अनगिनत लोगों ने अपना योगदान दिया। ऐसे स्वतंत्रता सेनानियों को पहचान देना और उनके संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

Editor CP pandey

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