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नशामुक्त समाज की ओर

समस्या की गंभीरता और समाधान की दिशा में सामूहिक प्रयास जरूरी-चंद्रकांत

गुजरात(राष्ट्र की परम्परा)
नशा आज समाज की एक ऐसी गहरी समस्या बन चुकी है, जो हर वर्ग और आयु समूह को प्रभावित कर रही है। गांवों से लेकर शहरों तक, नशे की चपेट में आए लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बड़ी चिंता की बात यह है कि बच्चे भी इस जाल में फंस रहे हैं, जिससे उनके भविष्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
नशा न केवल व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक स्थिति को असंतुलित करता है, बल्कि उसके निर्णय लेने की क्षमता, सामाजिक व्यवहार और पारिवारिक जीवन पर भी गहरा असर डालता है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत में लगभग 16 करोड़ लोग शराब का नशा करते हैं, जिनमें 1.5 करोड़ महिलाएं शामिल हैं। बच्चों और युवाओं में नशे की बढ़ती लत समाज के लिए खतरे की घंटी है।

अवैध नशे का बढ़ता कारोबार

‘ड्रग वार डिस्टॉर्सन’ और एम्स की रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनिया में मादक पदार्थों का अवैध कारोबार सालाना 30 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। भारत में यह आंकड़ा लगभग 10 लाख करोड़ रुपये है। 2017 में देश में 353 टन गांजा और 3.2 टन चरस जब्त किया गया।

नशामुक्ति के लिए कानूनी और सामाजिक प्रयास

भारत में एनडीपीसी एक्ट 1985 के तहत नशे के व्यापार और सेवन पर कड़ी सजा का प्रावधान है। फिर भी, नशे का अवैध कारोबार और इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। समाज को नशामुक्त बनाने के लिए ऊपरी और जमीनी स्तर पर व्यापक प्रयासों की जरूरत है।

समाज की जिम्मेदारी
नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल कानून ही पर्याप्त नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। बच्चों और युवाओं को इस जाल से बचाने के लिए जागरूकता और नैतिक शिक्षा पर जोर देना होगा।

यदि हम नशामुक्त समाज का सपना देखना चाहते हैं, तो इसे साकार करने के लिए सामूहिक प्रयास ही सबसे बड़ा हथियार है। अब समय आ गया है कि हम इस दिशा में ठोस कदम उठाएं।

rkpnews@somnath

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