दशकों से डिपो बनाए जाने की मांग अनदेखी
समाजसेवियों की मांग फिर भी अधूरी
नगर पालिका परिषद ने समाधान के लिए आश्वासन दिया
उतरौला/बलरामपुर (राष्ट्र की परम्परा)। उतरौला का बस स्टॉप यात्रियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। पिछले कई दशकों से डिपो बनाए जाने की मांग की जा रही है, लेकिन नगर के जिम्मेदार लोगों की अनदेखी के चलते न तो डिपो बन सका और न ही यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकीं। बस स्टॉप पर यात्रियों के लिए सबसे बड़ी समस्या शौचालय की व्यवस्था की है। वर्षों पहले बना शौचालय अब पूरी तरह से बंद है। इसकी दुर्दशा इतनी बढ़ चुकी है कि इसे इस्तेमाल करने की बजाय यात्री मजबूरन आसपास के स्थानों का सहारा लेते हैं। यह स्थिति विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों के लिए बेहद कठिनाई पैदा कर रही है। स्थानीय समाजसेवी एवं बुद्धिजीवी लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। समाजसेवी लोकतंत्र सेनानी चौधरी इरशाद अहमद गद्दी का कहना है कि बस स्टॉप की दशा इतनी खराब है कि बाहर से आने वाले यात्रियों को उतरते ही असुविधा का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि कई बार लिखित रूप से नगर पालिका और परिवहन विभाग को पत्र भी भेजे गए हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
वहीं, नगर के समाजसेवी व सपा नेता आदिल हुसैन का कहना हैं, “हमारे नगर का बस स्टॉप यात्रा के लिए प्रमुख पड़ाव है। लेकिन शौचालय न होने के कारण यात्रियों को भारी परेशानी होती है। यह महिलाओं और बच्चों की गरिमा से भी जुड़ा सवाल है।”
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि जल्द से जल्द बस स्टॉप पर शौचालय की सुविधा बहाल की जाए और यात्रियों की सुविधा के लिए पेयजल, छाया और बैठने के स्थान की भी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
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