मत्स्यपालन उद्योग में असीमित संभावनाए मौजूद :डीएम

बायोफ्लॉक तकनीकी से मछली पालन कर हो रही है आय में चार गुना से अधिक की वृद्धि

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)

यदि आप उद्यमी बनने की सोच रहे हैं और आपके पास मजबूत इरादा है तो प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ उठाकर बायोफ्लॉक विधि से मत्स्यपालन कर अपने सपने को पूरा कर सकते हैं। जनपद में एक दर्जन से अधिक मत्स्यपालक बायोफ्लॉक विधि से मछली पालन कर अपनी आमदनी को चार गुना तक बढ़ा कर खुशहाली की राह पर अग्रसर हैं।ऐसा ही एक उदाहरण है भाटपाररानी तहसील के पिपरापट्टी ग्राम निवासी महिला मत्स्य पालक मनोरमा सिंह का, जिन्होंने बायोफ्लॉक मछली पालन के जरिये कामयाबी की इबारत लिखी है।बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन की परियोजना लागत 14 लाख रुपये की होती है, जिसमें से मनोरमा सिंह को मत्स्य पालन विभाग द्वारा 8 लाख 40 हजार रुपये का अनुदान उपलब्ध कराया गया। उन्होंने बायोफ्लॉक विधि से अपने खेत के मध्य में 35*35 आकार के कृत्रिम तालाब का निर्माण कराया और फ़ंगेसियस एवं तिलापिया प्रजाति की मछलियों का पालन शुरू किया। शेष भूमि पर पूर्व की भांति खेती जारी रखी। तालाब के पानी में कई पोषक तत्व रहते हैं, जिसका उपयोग सिंचाई में अत्यंत लाभप्रद सिद्ध हुआ। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति भी बढ़ी और उपज भी बेहतर हुई। साथ ही मछली पालन से आय प्राप्त होने लगी। छोटे से प्लाट से वे सलाना 16 टन मछली प्राप्त करती है, जिसे वे स्थानीय विक्रेताओं को उपलब्ध कराती हैं उन्होंने बताया कि उन्हें बायोफ्लॉक विधि से मछली पालन करने से उनकी सलाना कमाई आठ लाख रुपये से अधिक की हो गई।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य पालक विकास अभिकरण नंदकिशोर ने बताया कि बायोफ्लॉक तकनीक पूरी तरह से इको फ्रेंडली है। इसमें मछलियां तेज गति से वृद्धि करती हैं। यदि कोई किसान बायोफ्लॉक तकनीक से मत्स्य पालन के संबन्ध में कोई जानकारी प्राप्त करना चाहता है तो वह उनके सीयूजी नंबर 9450097711 पर अथवा विकास भवन देवरिया स्थित उनके कार्यालय में संपर्क कर सकता है।

जिलाधिकारी अखंड प्रताप सिंह ने बताया कि बायोफ्लॉक पद्धति से मछली पालन कर आर्थिक तरक्की की राह खुल रही है। जनपद में मत्स्यपालन उद्योग में असीमित संभावना मौजूद है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत कृषकों को मछली पालन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

rkpnews@desk

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