23 सैनिकों और 10 नागरिकों की मौत के बाद अफगान-पाक सीमा पर थमा युद्ध, क़तर की भूमिका अहम

काबुल/इस्लामाबाद (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।
लगातार एक हफ्ते से जारी खूनी संघर्ष और सैकड़ों जिंदगियों को झकझोर देने वाली सीमा झड़पों के बाद आखिरकार अफगानिस्तान और पाकिस्तान ने युद्धविराम का ऐलान किया है। यह फैसला क़तर और तुर्की की मध्यस्थता में हुई लंबी, गहन बातचीत का नतीजा है, जिसने दोनों पड़ोसी देशों के बीच स्थायी शांति की उम्मीद जगा दी है।

क़तर के विदेश मंत्रालय ने शनिवार (19 अक्टूबर) को पुष्टि की कि दोनों देश न केवल तत्काल युद्धविराम पर सहमत हुए हैं, बल्कि दीर्घकालिक स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए संयुक्त तंत्र बनाने पर भी चर्चा हुई है।

इस बातचीत का नेतृत्व पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने किया, जबकि अफगानिस्तान की ओर से तालिबान नेतृत्व के वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद थे। दोनों पक्ष आने वाले दिनों में फॉलो-अप वार्ताओं के जरिए संघर्षविराम की निगरानी और भरोसा बहाली की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे।

🔥 पृष्ठभूमि: खूनी सीमा झड़पों ने ली 30 से अधिक जानें

यह संघर्ष 14 अक्टूबर की रात स्पिन बोल्डक (अफगानिस्तान) और चमन (पाकिस्तान) की सीमा पर दोबारा भड़क उठा था। पाकिस्तानी सेना के मुताबिक, झड़पों में 23 सैनिकों की मौत हुई, जबकि अफगान अधिकारियों ने दावा किया कि पाकिस्तानी हवाई हमलों में कम से कम 10 नागरिक, जिनमें महिलाएं, बच्चे और एक स्थानीय क्रिकेटर शामिल थे, की जान गई।

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पहले बुधवार को 48 घंटे का अस्थायी युद्धविराम घोषित हुआ था, मगर शुक्रवार शाम इसे खत्म कर दिया गया और उसके तुरंत बाद सीमा पार जवाबी हमले शुरू हो गए।

🌐 क्षेत्रीय चिंता और वैश्विक अपील

इस तनावपूर्ण स्थिति पर सऊदी अरब, क़तर और तुर्की जैसे क्षेत्रीय देशों ने संयम बरतने की अपील की थी। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी हिंसा इस्लामिक स्टेट (ISIS) और अल-क़ायदा जैसे आतंकी संगठनों को दोबारा सक्रिय होने का मौका दे सकती है।

2,611 किलोमीटर लंबी अफगान-पाक सीमा दशकों से दोनों देशों के बीच आतंकी गतिविधियों और घुसपैठ के आरोपों को लेकर विवाद का केंद्र रही है। पाकिस्तान अफगानिस्तान पर अपने विरोधी सशस्त्र गुटों को शरण देने का आरोप लगाता है, जिसे तालिबान सरकार ने बार-बार नकारा है।

✍️ युद्धविराम दोनों देशों के बीच रिश्तों में नया मोड़ साबित हो सकता है। अब दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह संघर्ष विराम शांति की दिशा में स्थायी कदम बनेगा या एक और अस्थायी राहत साबित होगा।

Editor CP pandey

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