बनकटा/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। यूपी-बिहार सीमा क्षेत्र में तस्करी पर रोक आखिर कैसे लगे, जब पुलिस चेकपोस्ट ही खाली कुर्सियों के भरोसे संचालित हो रही हो? एक ओर तस्करी अपने चरम पर है, वहीं पुलिस जांच चौकियों की स्थिति ऐसी है कि वे अक्सर वीरान पड़ी रहती हैं। गुरुवार सुबह बनकटा थाना क्षेत्र के रामपुर बुजुर्ग पुलिस चेकपोस्ट पर पुलिस निगरानी की हकीकत सामने आई जब चेकपोस्ट की कुर्सी खाली पाई गई और चौकी के ऑफिस में ताला लटका मिला। ऐसे में, यह स्पष्ट हो गया कि सीमा पर निगरानी का दावा महज दिखावा है। इस लापरवाही का सीधा फायदा तस्करों को मिल रहा है, जो यूपी से बिहार तक शराब की खेप आसानी से पहुंचा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, यूपी के कई सीमावर्ती गांव तस्करी के अड्डे बन चुके हैं, जिनमें ताली मठिया, रामपुर बुजुर्ग, एकडंगा, रामकोला, बरिगहवा, पकड़ी नरहिया, सुन्दरपार, बनकटा जगदीश, बनकटा चित्रसेन, दरगेचक, हाता, बंकुल, भवानी छापर आदि प्रमुख हैं। यहाँ से रोजाना भारी मात्रा में शराब बिहार भेजी जा रही है। बिहार में शराबबंदी लागू होने के कारण यूपी के सीमावर्ती इलाकों में शराब तस्करी का धंधा जोरों पर है। यही कारण है कि बिहार पुलिस सतर्क है और लगातार बड़ी खेप पकड़ रही है। उदाहरण के तौर पर, पिछले वर्ष बिहार के धरनीछापर चेकपोस्ट पर कई बार शराब की बड़ी खेप पकड़ी गई, जबकि उसी मार्ग पर स्थित यूपी पुलिस की चौकी से तस्कर आसानी से बच निकलते हैं।
पिछले वर्ष बिहार पुलिस द्वारा पकड़ी गई तस्करी की कुछ प्रमुख घटनाएं:
इन घटनाओं से यह साफ है कि बिहार पुलिस लगातार शराब तस्करों पर कार्रवाई कर रही है, जबकि यूपी पुलिस की चौकी तस्करों को रोकने में नाकाम साबित हो रही है। सूत्रों की मानें तो शराब तस्करी का यह नेटवर्क सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा है, जिसमें स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। यह चर्चा जोरों पर है कि यूपी पुलिस के कुछ कर्मी तस्करों को संरक्षण दे रहे हैं, जिसके कारण यूपी चेकपोस्ट से शराब की बड़ी खेप पार हो जाती है, लेकिन बिहार में पकड़ी जाती है। रामपुर बुजुर्ग पुलिस चौकी सलेमपुर-मैरवा मार्ग पर स्थित है और यहां से महज 200 मीटर की दूरी पर बिहार पुलिस की धरनीछापर चेकपोस्ट है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि बिहार पुलिस लगातार तस्करी की खेप पकड़ रही है, जबकि यूपी पुलिस को तस्करों की भनक तक नहीं लगती। यह लापरवाही केवल पुलिस प्रशासन पर सवाल खड़े नहीं करती, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सीमावर्ती इलाकों में तस्करी रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था पूरी तरह से फेल हो चुकी है। यदि जल्द ही यूपी पुलिस ने अपनी चौकसी नहीं बढ़ाई, तो यह इलाका शराब तस्करी का बड़ा हब बन सकता है।
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