इक्कीसवीं शताब्दी का
छब्बीसवाँ साल आ चुका है,
आध्यात्मिकता का स्थान,
भौतिकता ने ले लिया है,
भारतीय सभ्यता और
हमारी सनातन संस्कृति में
पाश्चात्य की आधुनिकता
का मुलम्मा चढ़ चुका है।
आदित्य की बात सही है,
जमाना बहुत बदल चुका है।
सारा सिस्टम भ्रष्टाचार
की भेंट चढ़ चुका है,
केवल और केवल पैसे के
लालच में जुटा है,
जमाने से अब इंसानियत
खत्म हो चुकी है,
स्वार्थ में इन्सान इन्सान
का शत्रु बन चुका है।
आदित्य की बात सही है,
जमाना बहुत बदल चुका है।
शहर हो या देहात हो, बस
पैसे का बोलबाला है,
प्रेम, दया, क्षमा, सौहार्द,
स्वार्थ की भेंट चढ़ चुके हैं,
पराये तो पराये, अपने भी
सब पराये हो चुके हैं,
सभी सगे और दूर के रिश्ते
पैसे के साथी बन चुके हैं।
आदित्य की बात सही है,
जमाना बहुत बदल चुका है।
डा० कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
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