हर घर नल का वादा अधूरा, भलुअनी ब्लॉक में जमीनी सच्चाई उजागर

देवरिया के भलुअनी ब्लॉक के ठाकुरदेवा गांव की जलजीवन योजना की हकीकत—प्यास से जूझते ग्रामीण, अधिकारी मौन

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)जिले के भलुअनी विकासखंड अंतर्गत ठाकुरदेवा गांव में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जलजीवन योजना आज भी कागजों और फाइलों तक ही सीमित नजर आ रही है। वर्षों पहले “हर घर नल से जल” का सपना दिखाकर शुरू की गई इस योजना से ग्रामीणों को आज तक एक बूंद स्वच्छ पेयजल भी नसीब नहीं हो सका है। परिणामस्वरूप, गांव के सैकड़ों परिवार आज भी हैंडपंप, कुएं और दूर-दराज के तालाबों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।

ये भी पढ़ें –भिटौली पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 549 बोरी अवैध चाइनीज लहसुन बरामद, डीसीएम टाटा वाहन जप्त

गांव की महिलाएं और बच्चे सुबह-सुबह पानी की तलाश में निकलते हैं। कई बार दो से तीन किलोमीटर दूर जाकर उन्हें पानी भरना पड़ता है। गर्मी के दिनों में हालात और बदतर हो जाते हैं। बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह स्थिति बेहद कष्टदायक बन चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना के तहत नल तो लगाए गए, पाइप लाइनें बिछाईं गईं, लेकिन उनमें आज तक पानी नहीं आया।

स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, कई बार इस समस्या की शिकायत ग्राम सभा से लेकर ब्लॉक कार्यालय और जिला प्रशासन तक की जा चुकी है। बावजूद इसके, न तो कोई ठोस कार्यवाही हुई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति की गंभीरता को समझने की कोशिश की। अधिकारियों की चुप्पी और उदासीनता से अब ग्रामीणों का सरकार और सिस्टम से भरोसा टूटता जा रहा है।

ये भी पढ़ें –दिल्ली में स्मॉग का घना कहर: AQI 305 के साथ हवा ‘बहुत खराब’, ठंड ने बढ़ाई मुश्किलें

सरकार की मंशा भले ही हर घर को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहती है। देवरिया जलजीवन योजना का यह उदाहरण दर्शाता है कि योजनाओं का क्रियान्वयन सही तरीके से नहीं हो पा रहा है। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो जल संकट और भी भयावह रूप ले सकता है।

ये भी पढ़ें –हुमायूं कबीर के बाबरी मस्जिद शिलान्यास पर बजरंग दल का तीखा विरोध, इनाम की घोषणा से बढ़ी हलचल

ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जल्द ही पानी की व्यवस्था सुचारू नहीं की गई, तो वे जन आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। यह मुद्दा अब सिर्फ पानी का नहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेही और प्रशासनिक पारदर्शिता का बन चुका है।

Editor CP pandey

Recent Posts

प्याज-चीनी की महंगाई से बढ़ी रसोई की चिंता, क्या बफर स्टॉक बनेगा किसान-उपभोक्ता संतुलन का समाधान?

रसोई में महंगाई का तड़का: प्याज 70 रुपये पार, चीनी की तेजी ने बढ़ाई चिंता;…

6 hours ago

औद्योगिक भ्रमण में विद्यार्थियों ने समझी उद्योग जगत की कार्यप्रणाली

बिछुआ (राष्ट्र की परम्परा)। कक्षा में पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों को उद्योग जगत की वास्तविक…

9 hours ago

राखी का संदेश

✍️ विजय गुंजन स्नेह है, अनुराग है, पवित्रता का बंधन है,ममता भरे एक धागे का…

10 hours ago

रक्षा बंधन: रिश्तों की डोर से राष्ट्र की परम्परा तक

नवनीत मिश्र रक्षा बंधन केवल कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के…

19 hours ago

रॉयल्टी के छह गुना दंड से परेशान पीडब्ल्यूडी ठेकेदार, कार्य बहिष्कार की तैयारी

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। लोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश के ठेकेदार रॉयल्टी से जुड़े मामलों…

22 hours ago

भाई-बहन का स्नेहाकाश

✍️ संजय एम. तराणेकर कलाई पर बंधता धागा है,पर बंधता है उससे विश्वास,बहन की आँखों…

1 day ago