नैनो यूरिया व नैनो डीएपी की टैगिंग पर किसानों ने जताई नाराजगी, भूमि की जरूरत के अनुसार खाद उपलब्ध कराने की मांग
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। विकास भवन सभागार में आयोजित किसान दिवस में खाद की उपलब्धता, उर्वरकों के साथ नैनो उत्पादों की टैगिंग और निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बिक्री का मुद्दा प्रमुखता से उठा। किसानों ने कृषि निवेश समय से उपलब्ध कराने तथा भूमि की आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों का वितरण सुनिश्चित करने की मांग की। मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में अधिकारियों ने किसानों की समस्याएं सुनीं और रबी सीजन की तैयारियों के साथ फसल अवशेष प्रबंधन पर चर्चा की।बैठक में किसान अजय चौरसिया ने यूरिया और डीएपी के साथ नैनो यूरिया व नैनो डीएपी की टैगिंग किए जाने तथा निर्धारित दर से अधिक कीमत पर उर्वरक बेचे जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने किसानों को इस समस्या से राहत दिलाने की मांग की। वहीं, सिसवा विकास खंड के किसान रमेश चंद्र पटेल ने उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और भूमि की जरूरत के अनुरूप खाद उपलब्ध कराने पर जोर दिया। सदर विकास खंड के किसान संतराज यादव ने खाद, बीज और उद्यान विभाग से संबंधित कृषि निवेश समय से उपलब्ध कराने की मांग की।अधिकारियों ने किसानों को जानकारी दी कि आगामी रबी सीजन के लिए दलहन, तिलहन और गेहूं के बीज के साथ दलहनी एवं तिलहनी फसलों की बीज मिनीकिट जनपद के सभी विकास खंडों में उपलब्ध करा दी गई हैं। किसानों से संबंधित विभागों से संपर्क कर निर्धारित व्यवस्था के तहत बीज और अन्य कृषि निवेश प्राप्त करने की अपील की गई।बैठक में उप कृषि निदेशक ने किसानों को धान की पराली नहीं जलाने के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। किसानों को फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन अपनाने की सलाह दी गई। उन्होंने बताया कि पराली जलाने के मामलों में नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है। साथ ही किसानों से स्वयं पराली नहीं जलाने और अन्य किसानों को भी जागरूक करने की अपील की।एआर कोऑपरेटिव सुनील गुप्ता ने उर्वरकों के वैज्ञानिक एवं संतुलित उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि अधिक मात्रा में खाद डालना बेहतर उत्पादन की गारंटी नहीं है। जरूरत से ज्यादा उर्वरक का प्रयोग फसल और भूमि की उर्वरता दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने किसानों को मिट्टी की स्थिति और फसल की आवश्यकता के अनुसार ही खाद का इस्तेमाल करने की सलाह दी।किसान दिवस में कृषि, पशुपालन, उद्यान, मत्स्य, गन्ना, सिंचाई, विद्युत, खाद्य एवं रसद तथा दुग्ध विकास विभाग के अधिकारियों के अलावा इफको और नाबार्ड के जिला प्रबंधक, अग्रणी बैंक प्रबंधक तथा कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक मौजूद रहे।
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