‘लैंड फॉर जॉब’ केस पर निगाहें, सियासत में मच सकता है भूचाल

नई दिल्ली/पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।
राजनीतिक गलियारों की नज़रें आज दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट पर टिकी हैं, जहां आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले में फैसला सुनाया जा सकता है। अदालत ने तीनों को सोमवार को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। इसी को लेकर पूरा लालू परिवार रविवार को ही दिल्ली पहुंच गया था।

यह दिन राजद के लिए कई मायनों में निर्णायक साबित हो सकता है, क्योंकि इसी दिन महागठबंधन की सीट-बंटवारे को लेकर भी बड़ा ऐलान संभव है। ऐसे में बिहार की सियासत में आज हलचल तेज़ है।

तेजस्वी यादव के लिए यह सिर्फ़ कानूनी नहीं, बल्कि एक राजनीतिक परीक्षा भी मानी जा रही है। अगर फैसला लालू परिवार के पक्ष में आता है, तो आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले यह राजद और महागठबंधन के लिए बड़ी राहत होगी। मगर यदि निर्णय प्रतिकूल रहा, तो विपक्ष, ख़ासकर भाजपा, इसे एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने में देर नहीं करेगी।

तेजस्वी यादव ने इससे पहले कई बार कहा है कि, “हमने कोई गलत काम नहीं किया है, यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। सच्चाई हमारे साथ है।”
राजद खेमे में फिलहाल भरोसे और उम्मीद का माहौल है कि न्यायालय से उन्हें राहत मिलेगी।

🔹 क्या है मामला

यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, रेलवे में नौकरी के बदले उम्मीदवारों से जमीन ली गई। जांच एजेंसी ने लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव सहित कई अन्य पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप लगाए हैं।

सीबीआई का कहना है कि इस दौरान बिहार और झारखंड के कई परिवारों ने अपनी ज़मीन लालू परिवार या उससे जुड़े लोगों के नाम कर दी थी, बदले में उनके रिश्तेदारों को रेलवे में नौकरी मिली।

🔹 राजनीतिक असर

फैसले का असर न सिर्फ लालू परिवार पर, बल्कि बिहार की राजनीति पर भी गहराई से पड़ सकता है। अगर लालू परिवार निर्दोष साबित हुआ, तो महागठबंधन को चुनावी ऊर्जा मिलेगी। वहीं, विपरीत निर्णय की स्थिति में विपक्ष इसे “भ्रष्टाचार का प्रतीक” बताकर चुनावी हवा बदलने की कोशिश करेगा।

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Editor CP pandey

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