जम्मू-कश्मीर की सियासत में ‘पाक बातचीत’ पर फिर छिड़ा घमासान, महबूबा बनाम उमर में तकरार तेज


अनुच्छेद 370 हटने के बाद क्षेत्रीय दलों की रणनीति को लेकर नया राजनीतिक मोड़

श्रीनगर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर पाकिस्तान से बातचीत का मुद्दा गरमा गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती द्वारा पाकिस्तान से संवाद की वकालत करने के बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि “पाकिस्तान से बातचीत का समर्थन करने वाले ही आज सबसे कमजोर पड़ रहे हैं।”

महबूबा मुफ्ती ने अपने बयान में कहा था कि कश्मीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए भारत को पाकिस्तान से संवाद करना होगा। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि सीमा पार से जारी तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक रास्ता अपनाया जाए। उनके अनुसार, केवल सैन्य ताकत या राजनीतिक दमन से जम्मू-कश्मीर में शांति कायम नहीं की जा सकती।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उमर अब्दुल्ला ने दो टूक कहा, “आज जो लोग पाकिस्तान से बात करने की पैरवी कर रहे हैं, दरअसल वे ही अपनी राजनीतिक जमीन खो चुके हैं। कश्मीर के लोगों की प्राथमिकताएं बदल रही हैं। अब भावनात्मक नारों की जगह विकास और रोजगार की बातें हो रही हैं।”

अनुच्छेद 370 के बाद सियासी समीकरण

गौरतलब है कि 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया है। क्षेत्रीय दल नई राजनीतिक रणनीति बनाने में जुटे हैं। जहां पीडीपी अब भी कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए पाकिस्तान से संवाद को आवश्यक मानती है, वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस धीरे-धीरे राष्ट्रीय राजनीतिक धारा में समाहित होने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयानबाज़ी केवल पाकिस्तान से बातचीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी का हिस्सा भी है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद दोनों क्षेत्रीय दलों को राजनीतिक नुकसान झेलना पड़ा है, और वे अपनी खोई हुई जमीन को फिर से हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

भाजपा और अन्य दलों की प्रतिक्रिया

इस पूरे मुद्दे पर भाजपा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा, “पाकिस्तान से बातचीत की बात करना शहीदों का अपमान है। जो नेता कश्मीर में पाकिस्तान का नाम लेते हैं, वे देश की एकता के खिलाफ खड़े हैं।”

जम्मू-कश्मीर की राजनीति एक बार फिर पुराने मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमने लगी है। पाकिस्तान से बातचीत, अनुच्छेद 370 की बहाली और क्षेत्रीय पहचान जैसे मुद्दे फिर से चुनावी बहस का हिस्सा बनते नजर आ रहे हैं। हालांकि राज्य के आम लोगों की अपेक्षाएं अब शिक्षा, रोजगार, विकास और सुरक्षा से जुड़ी हैं, लेकिन क्षेत्रीय दल अब भी भावनात्मक और पहचान की राजनीति के सहारे अपनी सियासी जमीन तलाशने की कोशिश में हैं।

Editor CP pandey

Recent Posts

खेती-किसानी को नई दिशा देगा केंद्रीय बजट: पवन मिश्र

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा) । प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman…

4 minutes ago

14 स्थानों पर 242 व्यक्तियों और 127 वाहनों की जांच

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)जनपद में कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा आमजन में सुरक्षा…

4 minutes ago

पीपीगंज में छात्रा का अश्लील वीडियो वायरल: जबरन संबंध का दबाव, जांच के आदेश

गोरखपुर/पीपीगंज (राष्ट्र की परम्परा)। पीपीगंज थाना क्षेत्र में इंटर की एक छात्रा ने कारोबारी के…

5 hours ago

प्रयागराज कोर्ट का आदेश: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ FIR दर्ज होगी

प्रयागराज (राष्ट्र की परम्परा)। प्रयागराज की विशेष पॉक्सो अदालत ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ…

5 hours ago

Samajwadi Party का बागियों के लिए ‘वापसी फॉर्मूला’: राज्यसभा वोट से खुलेगा रास्ता

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। Samajwadi Party (सपा) ने अपने बागी विधायकों की घर वापसी के…

5 hours ago

क्या कहता है आपका मूलांक? जानें इस सप्ताह का अंक ज्योतिष भविष्यफल

साप्ताहिक मूलांक राशिफल: मूलांक 1 से 9 तक का विस्तृत भविष्यफल, जानें इस सप्ताह का…

6 hours ago