सरायकेला (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)झारखंड के सरायकेला जिले में नाबालिग से छेड़छाड़ के गंभीर मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को दोषी करार दिया है। इस चर्चित सरायकेला छेड़छाड़ केस में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामाशंकर सिंह की अदालत ने आरोपी हिमांशु पांडे को 4 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
कोर्ट ने न सिर्फ जेल की सजा सुनाई बल्कि आरोपी पर आर्थिक दंड भी लगाया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ऐसे अपराधों के प्रति न्यायपालिका का रुख बेहद सख्त है।
पॉक्सो एक्ट के तहत सजा
इस मामले की सुनवाई पॉक्सो एक्ट सजा के तहत की गई। अदालत ने आरोपी को नाबालिग के साथ अश्लील छेड़छाड़ का दोषी मानते हुए,4 साल सश्रम कारावास ,₹2000 जुर्माना,जुर्माना न देने पर 2 महीने अतिरिक्त सजा,यह फैसला नाबालिगों के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
IPC की धाराओं में भी सजा
अदालत ने केवल पॉक्सो एक्ट ही नहीं, बल्कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत भी आरोपी को दोषी पाया,धारा 354 (छेड़छाड़): 2 साल सश्रम कारावास + ₹1000 जुर्माना,धारा 504 (गाली-गलौज): 1 साल सश्रम कारावास + ₹500 जुर्माना,,धारा 506 ,(धमकी): 2 साल सश्रम कारावास + ₹1000 जुर्माना हर धारा में जुर्माना न देने पर अतिरिक्त कारावास का प्रावधान भी रखा गया है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, जिससे कुल सजा की अवधि प्रभावी रूप से 4 साल ही रहेगी।
क्या है पूरा मामला
यह आदित्यपुर थाना क्षेत्र का मामला है, जहां 16 मई 2022 को पीड़िता के पिता ने लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत के अनुसार:14 मई की शाम पीड़िता घर के लिए सामान लेने दुकान जा रही थी,
वह लिफ्ट का इंतजार कर रही थी,तभी आरोपी हिमांशु पांडे लिफ्ट से बाहर निकला, उसने नाबालिग को अकेला पाकर अश्लील हरकत शुरू कर दी,यह घटना सरायकेला छेड़छाड़ केस का मुख्य आधार बनी।
विरोध करने पर दी धमकी
जब पीड़िता ने आरोपी का विरोध किया, तो आरोपी ने,गाली-गलौज की जान से मारने की धमकी दी,किसी को बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी, डरी हुई पीड़िता तुरंत घर पहुंची और अपनी मां को पूरी घटना बताई।
परिवार को भी धमकाया
पीड़िता के पिता जब आरोपी के परिजनों से बात करने पहुंचे, तो आरोपी ने उन्हें भी गालियां दीं।जान से मारने की धमकी दी इसके बाद परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर मामला आगे बढ़ा और जांच के बाद कोर्ट में सुनवाई हुई।
अदालत का संदेश
इस पॉक्सो एक्ट सजा के फैसले के जरिए अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि,नाबालिगों के खिलाफ अपराध बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।दोषियों को कठोर सजा मिलेगी,कानून पीड़ितों के साथ खड़ा है।यह फैसला समाज में बढ़ते अपराधों के खिलाफ एक मजबूत उदाहरण माना जा रहा है।
समाज के लिए सबक
सरायकेला छेड़छाड़ केस केवल एक मामला नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी भी है।
बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए,परिवारों को जागरूक रहना जरूरी है
ऐसे मामलों में तुरंत शिकायत करना जरूरी है।पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया की भूमिका
इस मामले में,पुलिस ने शिकायत के आधार पर कार्रवाई की,साक्ष्यों के आधार पर केस मजबूत बनाया गया।अदालत ने समयबद्ध सुनवाई कर फैसला सुनाया।यह दर्शाता है कि सही प्रक्रिया अपनाने पर न्याय मिलना संभव है।
सरायकेला में नाबालिग से छेड़छाड़ का यह मामला अब न्यायिक निष्कर्ष तक पहुंच चुका है। अदालत द्वारा सुनाई गई पॉक्सो एक्ट सजा न केवल पीड़िता के लिए न्याय है, बल्कि समाज में अपराधियों के लिए चेतावनी भी है।
इस तरह के मामलों में त्वरित कार्रवाई और सख्त सजा ही अपराध पर नियंत्रण का सबसे प्रभावी तरीका है।
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