तेजस्वी के उभार के पीछे उम्मीद से ज़्यादा विवशता

बिहार की राजनीति हमेशा से गठबंधनों, जातीय समीकरणों और भावनात्मक मुद्दों की प्रयोगशाला रही है। आज जब एक बार फिर राज्य की सियासत तेजस्वी यादव के नेतृत्व के इर्द-गिर्द घूम रही है, तब यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या यह समर्थन जन-आकांक्षा की स्वाभाविक स्वीकृति है, या परिस्थितियों की विवशता से उपजी सहमति?
तेजस्वी यादव ने हाल के वर्षों में अपने राजनीतिक कद को निस्संदेह बढ़ाया है। उन्होंने युवा नेतृत्व की छवि गढ़ने की कोशिश की, बेरोजगारी और विकास जैसे मुद्दों को सामने रखा, और यह दिखाने का प्रयास किया कि वे लालू युग की राजनीति से आगे बढ़कर “नई सोच का बिहार” चाहते हैं। किंतु जनादेश या राजनीतिक समर्थन का जो स्वरूप अब बनता दिख रहा है, उसमें उत्साह से अधिक विवशता झलकती है।
विवशता इसलिए कि बिहार की राजनीति में फिलहाल कोई ठोस वैकल्पिक चेहरा नहीं उभर पाया है। सत्ता-विपक्ष दोनों ही अपनी सीमाओं से जूझ रहे हैं — सत्ताधारी दल जनहित के वादों को अमल में उतारने में नाकाम साबित हुआ है, तो विपक्ष के पास तेजस्वी के अलावा कोई प्रभावशाली जननेता नहीं है। परिणामस्वरूप, जनता या गठबंधन सहयोगी दलों की स्वीकृति किसी वैचारिक सहमति से नहीं, बल्कि “कोई बेहतर विकल्प न होने” के कारण बनती दिख रही है।
तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद ने सामाजिक न्याय की विरासत को नए शब्दों में प्रस्तुत किया है, परंतु अब भी उस पर “परिवारवादी राजनीति” और “आर्थिक अक्षमता” की छाया बनी हुई है। उनके नेतृत्व में सरकार बनने की संभावनाएं तो हैं, पर भरोसे की नींव उतनी मजबूत नहीं दिखती। जनता में एक वर्ग ऐसा है जो बदलाव तो चाहता है, पर इस बदलाव की दिशा को लेकर आश्वस्त नहीं है।
राजनीति में किसी नेता की स्वीकार्यता तब सार्थक होती है, जब वह विश्वास, दृष्टि और परिणामों के आधार पर हो। केवल असंतोष के प्रतिफलस्वरूप किसी को विकल्प मान लेना लोकतंत्र की मजबूती नहीं, बल्कि उसकी सीमाओं का संकेत है। तेजस्वी यादव के लिए यह समय चुनौती और अवसर दोनों हैl वे चाहें तो इस “विवशता भरी स्वीकृति” को “विश्वासपूर्ण नेतृत्व” में बदल सकते हैं, बशर्ते वे शासन की स्थिरता, ईमानदारी और विकास के ठोस प्रमाण प्रस्तुत करें।
बिहार की जनता ने दरवाज़ा खोला है, पर चाबी अब भी संदेह की जेब में है। तेजस्वी को यह सिद्ध करना होगा कि वे केवल सत्ता के उत्तराधिकारी नहीं, बल्कि उम्मीदों के भी हक़दार हैं।

rkpNavneet Mishra

Recent Posts

छात्रवृत्ति समस्याओं को लेकर छात्रों ने की मुख्य विकास अधिकारी से मुलाकात

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)विकास भवन स्थित कार्यालय में छात्रवृत्ति से जुड़ी समस्याओं को लेकर बड़ी संख्या…

29 minutes ago

24 मार्च को जिले में होगा भव्य सामूहिक विवाह आयोजन

संत कबीर नगर(राष्ट्र की परम्परा)। जिले में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत 24 मार्च…

31 minutes ago

बलिया में शहीद दिवस पर विविध कार्यक्रम, युवाओं को राष्ट्र निर्माण का संदेश

बलिया(राष्ट्र की परम्परा) शहीद दिवस के अवसर पर “मेरा भारत, मेरी जिम्मेदारी” अभियान के तहत…

35 minutes ago

संपूर्ण समाधान दिवस में 55 शिकायतें, मौके पर 7 का निस्तारण

गैस न मिलने की शिकायत पर डीएम ने एजेंसी जांच के दिए आदेश दूसरे की…

40 minutes ago

बाबा जय गुरुदेव का सत्संग शाकाहार अपनाने का दिया संदेश

शाहजहांपुर जनपद(राष्ट्र की परम्परा)गढ़िया रंगीन स्थित कृषक जनता इंटर कॉलेज परिसर में बाबा जय गुरुदेव…

44 minutes ago

नहर की पटरी से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, झोपड़ियां ध्वस्त—इलाके में हड़कंप

विरोध के बीच चला बुलडोजर, पुनर्वास को लेकर उठे सवाल महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। भिटौली…

48 minutes ago