#Premchand’s #literary and #social #discussions #are #still #relevant today – #Krishna Kumar Yadav

आज भी प्रासंगिक हैं प्रेमचंद के साहित्यिक व सामाजिक विमर्श– कृष्ण कुमार यादव

"साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, बल्कि उसकी मशाल भी है।" यह कथन प्रेमचंद के साहित्यिक अवदान पर अक्षरशः खरा…

7 months ago