सामाजिक जिम्मेदारी

बेसहारा ज़िंदगी का वालिद कौन? समाज, परिवार और व्यवस्था पर उठते गंभीर सवाल

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। आज समाज के सामने एक ऐसा सवाल खड़ा है, जो जितना संवेदनशील है उतना ही शर्मनाक…

2 weeks ago

मानवता आज भी जिंदा है, बस उसे सुनने और समझने वाला चाहिए

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। तेज रफ्तार, तकनीक और दिखावे से भरे इस दौर में अक्सर कहा जाता है कि मानवता…

3 weeks ago

सुविधाओं की चकाचौंध में घिरता समाज, बढ़ती असुरक्षा बनी गंभीर चुनौती

कैलाश सिंहमहराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।आज का समाज सुविधाओं के मामले में अपने इतिहास के सबसे उन्नत दौर में खड़ा है।…

2 months ago

बुढ़ापा: डर नहीं, समझ और सम्मान की जरूरत

जीवन का अंतिम पड़ाव: बुढ़ापा — अनुभव, सम्मान और संवेदना की कसौटी लेखिका - सीमा त्रिपाठी,शिक्षिका, साहित्यकार, बलिया (राष्ट्र की…

2 months ago