Tag: ग्रामीण अर्थव्यवस्था

बढ़या बुजुर्ग में खुली उद्यम की राह, गांव में ही बन सकते हैं 24 रोजमर्रा के उत्पाद

गांव से हर साल बाहर जा रहे 56.68 करोड़ रुपये, ग्रामीणों ने पहचाने 24 स्थानीय कारोबार ‘संवाद-अभाव से अवसर की ओर’ कार्यशाला में आत्मनिर्भर गांव की दिशा पर मंथन देवरिया…

डिजिटल मार्केटिंग से पारंपरिक शिल्प को मिलेगा वैश्विक बाजार

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से पारंपरिक कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की मजबूत पहल देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। पारंपरिक शिल्प और कारीगरी को आधुनिक बाजार से जोड़कर कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के…

किसान अधिकार और बीज गुणवत्ता: नया नियामक ढांचा

नकली बीजों पर लगाम: बीज विधेयक 2025 से किसान संरक्षण, गुणवत्ता नियमन और वैश्विक कृषि शासन की ओर भारत का निर्णायक कदम गोंदिया | विशेष लेख वर्तमान डिजिटल और वैश्विक…

आत्मनिर्भर भारत का सपना और महराजगंज की जमीनी सच्चाई

डॉ. सतीश पाण्डेय महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। आत्मनिर्भर भारत का सपना देश के विकास विमर्श का केंद्र बन चुका है। नीति-निर्माता बार-बार यह दावा कर रहे हैं कि भारत आत्मनिर्भरता…

विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा

125 दिनों की रोजगार गारंटी, पारदर्शी भुगतान और टिकाऊ विकास पर केंद्रित ऐतिहासिक पहल कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। ग्रामीण भारत को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा…

रोजगार की तलाश या मजबूरी? गाँवों से लगातार पलायन का सच

(राष्ट्र की परम्परा)भारत के ग्रामीण समाज की पहचान रही है—आपसी जुड़ाव, सामूहिकता और परंपराओं की निरंतरता। लेकिन बदलते आर्थिक परिदृश्यों का सबसे बड़ा प्रभाव गाँवों में पलायन की तेज़ होती…