एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी

किसान से संविधान तक: भारत के राष्ट्र-निर्माण पर सांप्रदायिक हिंसा की छाया

भारत का राष्ट्र-निर्माण विमर्श बनाम सामाजिक यथार्थ:- किसान,सांप्रदायिक हिंसा और लोकतांत्रिक परीक्षा भूमिका:- एक समग्र विश्लेषण गोंदिया - 14 जनवरी…

3 months ago

जो बोएगा वही पाएगा,तेरा किया आगे आएगा,सुख-दुख है क्या, फल कर्मों का जैसी करनी वैसी भरनी

हमारा कर्म ही हमारा भविष्य हैं- धार्मिक, सामाजिक आध्यात्मिक और राजनीतिक दृष्टि से एक गहन विश्लेषण परिश्रम,अनुशासन और नवाचार का…

5 months ago