नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। मंगलवार (17 फरवरी, 2026) को Supreme Court ने उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के कथित नफरत भड़काने वाले बयानों के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि याचिका कुछ खास लोगों को निशाना बनाती प्रतीत होती है और इसे राजनीति से परे जाकर दाखिल किया जाना चाहिए।
अदालत ने टिप्पणी की कि यदि याचिकाकर्ता का उद्देश्य केवल कुछ नेताओं को ही लक्ष्य बनाना है और अन्य के बयानों को नजरअंदाज किया गया है, तो ऐसी याचिका की सुनवाई संभव नहीं है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता Kapil Sibal ने स्वीकार किया कि याचिका में कुछ विशेष नेताओं का नाम शामिल करना उचित नहीं था। उन्होंने दो सप्ताह के भीतर संशोधित याचिका दाखिल करने की बात कही।
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किन नेताओं का था उल्लेख
सामाजिक कार्यकर्ता रूप रेखा वर्मा समेत 12 लोगों की याचिका में Himanta Biswa Sarma के कथित मुस्लिम-विरोधी वीडियो के साथ उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश के कुछ नेताओं के बयानों का भी उल्लेख किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह भी समाज में भाईचारे और जिम्मेदार बयानबाजी की अपेक्षा करता है, लेकिन अदालत को राजनीतिक मंच में नहीं बदला जाना चाहिए।
हाईकोर्ट जाने का निर्देश
इससे पहले सोमवार को हिमंत बिस्वा सरमा के विवादित भाषण और वायरल वीडियो से संबंधित याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट ने सीधे सुनवाई से इनकार कर दिया था। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को संबंधित हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया।
मुख्य न्यायाधीश Surya Kant, जस्टिस Joymalya Bagchi और जस्टिस Vipul M Pancholi की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट की शक्तियों को कमतर नहीं आंका जाना चाहिए। वहां सक्षम न्यायाधीश और अधिवक्ता मौजूद हैं।
पीठ ने यह भी कहा कि चुनाव के समय अदालत को राजनीतिक युद्धक्षेत्र नहीं बनाया जाना चाहिए और राजनीतिक दलों को आपसी सम्मान व आत्मसंयम के साथ चुनाव लड़ना चाहिए।
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