अग्नि-5 का सफल परीक्षण: भारत ने दिखाई सामरिक शक्ति

नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) भारत ने अपनी सामरिक सैन्य क्षमताओं का जोरदार प्रदर्शन करते हुए बुधवार को मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल ‘अग्नि-5’ का सफल परीक्षण किया। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस अत्याधुनिक मिसाइल का परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से किया गया। परीक्षण के दौरान मिसाइल ने सभी परिचालन एवं तकनीकी मापदंडों को सफलतापूर्वक पूरा किया।

मंत्रालय के अनुसार, ‘‘मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल ‘अग्नि-5’ का 20 अगस्त को सफल परीक्षण किया गया। विभिन्न दूरमापी और रडार केंद्रों से इस पूरे परीक्षण पर नजर रखी गई और मिसाइल ने सभी निर्धारित मानकों को पूरा किया।’’

2012 में हुआ था पहला परीक्षण

गौरतलब है कि भारत ने पहली बार अग्नि-5 का परीक्षण 19 अप्रैल 2012 को चांदीपुर से किया था। उस समय इसे हिंद महासागर में एक पूर्व-निर्धारित लक्ष्य पर प्रक्षेपित किया गया था।

5,000 किलोमीटर तक की मारक क्षमता अग्नि-5 मिसाइल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है। यह मिसाइल 5,000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य भेदने में सक्षम है और अधिकतम 600 किलोमीटर की ऊंचाई तक जा सकती है। यह 1.5 टन तक का परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।

MIRV तकनीक से लैस अग्नि-5 मिसाइल MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल) तकनीक से लैस है। इसका मतलब है कि एक ही मिसाइल कई हथियारों से युक्त होकर अलग-अलग लक्ष्यों पर एक साथ प्रहार कर सकती है। इससे भारत की सामरिक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

अत्याधुनिक नेविगेशन सिस्टम मिसाइल को अचूक सटीकता देने के लिए इसमें RLG-INS (रिंग लेज़र जाइरोस्कोप आधारित इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम) और MINGS (माइक्रो-इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम) का प्रयोग किया गया है। ये प्रणाली भारत की अपनी उपग्रह नेविगेशन प्रणाली NavIC और अमेरिकी GPS से भी समर्थित हैं।

RLG-INS: बाहरी संकेतों पर निर्भर हुए बिना मिसाइल को सही रास्ते पर बनाए रखता है। NavIC: भारत की स्वदेशी उपग्रह प्रणाली, जो वास्तविक समय की स्थिति तय करने में मदद करती है।GPS: अमेरिकी प्रणाली, जो अतिरिक्त सटीकता प्रदान करती है।

तीन-चरणीय ठोस-ईंधन प्रणाली अग्नि-5 मिसाइल तीन-चरणीय ठोस-ईंधन प्रणाली से संचालित होती है और इसे कनस्तर से प्रक्षेपित किया जाता है। इससे मिसाइल को सुरक्षित तरीके से संग्रहीत, आसानी से स्थानांतरित और शीघ्र प्रक्षेपित किया जा सकता है। हाल के वर्षों में इसमें बेहतर एवियोनिक्स, पुनः प्रवेश पर मज़बूत ताप परिरक्षण और उन्नत मार्गदर्शन प्रणालियाँ जोड़ी गई हैं।

भारत की परमाणु रक्षा प्रणाली की रीढ़ विशेषज्ञों के मुताबिक, अग्नि-5 मिसाइल भारत की भूमि-आधारित परमाणु रक्षा प्रणाली की मुख्य ताकत है। यह न केवल भारत की सामरिक शक्ति को मजबूत करती है, बल्कि संभावित खतरों के खिलाफ विश्व मंच पर भारत की स्थिति को भी और सशक्त बनाती है।

Editor CP pandey

Recent Posts

बाल विकास परियोजना विक्रमजोत में नववे पोषण माह का शुभारंभ किया गया

बस्ती (राष्ट्र की परम्परा)l जिले के ब्लॉक विक्रमजोत सभागार में बाल विकास परियोजना विक्रमजोत में…

4 hours ago

सेवा संकल्प अभियान से जन-जन को जोड़ने की तैयारी, 17 सितंबर से शुरू होगा महीनेभर का कार्यक्रम

विकसित भारत@2047 के संकल्प के साथ गांव से शहर तक होंगे विविध आयोजन, विभागवार अधिकारियों…

4 hours ago

11 पदकों के दम पर एकेडमिक ग्लोबल स्कूल बना ओवरऑल रनरअप, खिलाड़ियों ने दिखाया शानदार खेल

दो स्वर्ण समेत 11 पदक जीतकर स्कूल ओलंपिक्स में हासिल किया दूसरा स्थान गोरखपुर (राष्ट्र…

4 hours ago

मोबाइल रिपेयरिंग प्रशिक्षण पूरा करने वाले 20 प्रशिक्षार्थियों को मिले प्रमाण-पत्र

छह दिव्यांगजनों को वितरित की गई व्हीलचेयर, स्वरोजगार के लिए कौशल का उपयोग करने का…

4 hours ago

राष्ट्रीय लोक अदालत में मोटर दुर्घटना वादों के निस्तारण पर जोर, 12 सितंबर को लगेगा स्वास्थ्य शिविर

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। आगामी 12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक…

4 hours ago

युवा सम्मेलन में संविधान और भारतीय संस्कृति पर विद्यार्थियों ने रखे विचार

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में मिहींपुरवा खंड…

4 hours ago