जनहित में चेतावनी जारी, आम को प्राकृतिक रूप से पकाने की अपील
सादुल्लानगर/बलरामपुर(राष्ट्र की परम्परा)। गर्मी के इस मौसम में आम का स्वाद सभी को लुभाता है, लेकिन स्वाद के साथ सेहत से समझौता न हो, इसके लिए डॉक्टरों ने खास चेतावनी जारी की है। क्षेत्र के अधिकांश आम बागानों में तुड़ाई का काम लगभग पूरा हो चुका है। कुछ किसानों ने ‘डाल का आम’ यानी पेड़ों पर प्राकृतिक रूप से पकने वाले आम छोड़ दिए हैं, जो स्वाद, सुगंध और स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर माने जाते हैं।
लेकिन बाजारों में बिक रहे अधिकांश आम – खासतौर पर दशहरी, चौसा, लंगड़ा, बॉम्बईया और तुकमी – तेजी से पकाने के लिए कार्बाइड या गंधक जैसे रसायनों की मदद से तैयार किए जा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह प्रक्रिया आम के स्वाद को तो नुकसान पहुंचाती ही है, साथ ही यह स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक हो सकती है।
स्थानीय चिकित्सक डॉ. विजयभान ने बताया कि रसायनयुक्त आमों का सेवन उल्टी, दस्त, पेट दर्द, गैस व अपच जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है। उन्होंने आम को खरीदने के बाद कम से कम 2–3 घंटे तक साफ पानी में भिगोकर रखने और फिर तीन बार ताजे पानी से धोने की सलाह दी है, जिससे आम की सतह पर लगे रसायन हटाए जा सकें।
डॉ.मंशालाल ने भी आगाह करते हुए कहा कि बच्चों, बुजुर्गों और पेट के रोगियों को आम खाने में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने बताया कि एक बार में अधिक मात्रा में आम खाने से भी परहेज करना चाहिए। सीमित मात्रा में और साफ-सफाई के बाद खाया गया आम शरीर को पोषण व गर्मी से राहत देने वाला सिद्ध हो सकता है।
युवा समाजसेवी/कृषि वैज्ञानिक डा० विवेक कुमार श्रीवास्तव ने जनहित को देखते हुए फल व्यापारियों से अपील की है कि आमों को रसायनों से न पकाएं, बल्कि उन्हें प्राकृतिक रूप से पकने दें। इससे न केवल आम का असली स्वाद और मिठास बनी रहेगी, बल्कि उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहेगा।
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