मातृशक्ति की भूमिका पर विशेष जोर, बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल

बरहज में हिंदू सम्मेलन आयोजित, सनातन संस्कृति और सामाजिक एकता पर जोर

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।कस्बा स्थित ऐश्वर्य पैलेस में शुक्रवार को आयोजित हिंदू सम्मेलन में सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। सम्मेलन का उद्देश्य अखिल भारतीय हिंदू समाज के बीच बंधुता, परस्पर सहयोग, स्वाभिमान और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करना रहा। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक रमेश ने भारत की सांस्कृतिक परंपराओं पर प्रकाश डालते हुए सनातन मूल्यों को समाज की आत्मा बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना से विश्व को परिवार मानती है और इसी दृष्टि ने भारत को युगों तक जीवंत रखा है।

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उन्होंने समाज से आह्वान किया कि आधुनिकता के साथ अपनी परंपराओं का संतुलन बनाए रखें। जन्मदिन जैसे अवसरों को सेवा, संस्कार और समाजहित से जोड़ने तथा प्रत्येक परिवार द्वारा कम से कम एक वृक्ष लगाने और उसके संरक्षण की पहल करने पर भी उन्होंने जोर दिया।
आश्रम पीठाधीश्वर आञ्जनेय दास महाराज ने विदेशी प्रभावों के बजाय अपने महापुरुषों के विचारों और संस्कारों को अपनाने की आवश्यकता बताई। बच्चों को सनातन धर्म, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने को उन्होंने समय की मांग कहा।
बारीपुर मंदिर के महंत गोपाल दास ने जाति-आधारित भेदभाव से ऊपर उठकर सामाजिक एकता की बात कही और समरसता को हिंदू समाज की शक्ति बताया। वहीं, डॉ. दर्शना श्रीवास्तव ने मातृशक्ति की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिलाओं की सहभागिता से सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता नरेश गोयल ने की तथा संचालन पंकज शुक्ला ने किया। आयोजन समिति के अध्यक्ष सचिन सिंह ने अतिथियों और उपस्थित जनमानस के प्रति आभार व्यक्त किया। सम्मेलन में विधायक दीपक मिश्र शाका सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता, संगठन पदाधिकारी, महिलाएं और पुरुष बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

Editor CP pandey

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