सिकंदरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)
सिकंदरपुर नगर की सड़कों की हकीकत यह है कि जब तक पुलिस अधीक्षक बलिया और जिलाधिकारी बलिया का दौरा प्रस्तावित रहता है, तब तक सड़कें साफ-सुथरी, अतिक्रमण मुक्त और क्लीन दिखाई देती हैं। अधिकारी जैसे ही क्षेत्र से रवाना होते हैं, वैसे ही हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौट आते हैं। सड़क किनारे ठेले, खोमचे, अस्थायी दुकानें और अवैध पार्किंग दोबारा जगह घेर लेती हैं, लेकिन यह अतिक्रमण संबंधित अधिकारियों को फिर दिखाई नहीं देता।नगर के मुख्य चौराहों, बस स्टैंड, बाजार और अस्पताल मार्गों पर अतिक्रमण आम बात हो गई है। प्रशासनिक निरीक्षण से पहले नगर पंचायत, पुलिस और अन्य विभाग संयुक्त रूप से अभियान चलाकर अतिक्रमण हटवाते हैं, नालियों की सफाई कराई जाती है और सड़कों पर पानी का छिड़काव तक होता है। इससे आमजन को कुछ समय के लिए राहत मिलती है, लेकिन यह राहत स्थायी नहीं होती। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान केवल “वीआईपी विजिट” तक सीमित रह गया है। स्थायी समाधान की कोई ठोस योजना नहीं बनाई जा रही। दुकानदारों और ठेला चालकों को वैकल्पिक व्यवस्था दिए बिना हटाया जाता है, जिससे वे कुछ ही दिनों में दोबारा सड़क पर आ जाते हैं।
नगरवासियों ने मांग की है कि जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के निर्देशों को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि नियमित निगरानी, सख्त कार्रवाई और वैकल्पिक बाजार व्यवस्था के जरिए अतिक्रमण की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। जब तक यह नहीं होगा, तब तक सिकंदरपुर की सड़कें केवल अधिकारियों के आने तक ही साफ दिखाई देती
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