देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
देवरिया के पलक लान परिसर में चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा महायज्ञ में कथा व्यास सुरभि जी ने शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाया। प्रसंग सुन श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। कथा व्यास ने कहा कि पर्वतराज हिमालय की घोर तपस्या के बाद माता जगदंबा प्रकट हुईं और उन्हें बेटी के रूप में उनके घर में अवतरित होने का वरदान दिया। इसके बाद माता पार्वती हिमालय के घर अवतरित हुईं। बेटी के बड़ी होने पर पर्वतराज को उनकी शादी की चिंता सताने लगी। कहा कि माता पार्वती बचपन से ही भगवान भोलेनाथ की अनन्य भक्त थीं। एक दिन पर्वतराज के घर महर्षि नारद पधारे और उन्होंने भगवान भोलेनाथ के साथ पार्वती के विवाह का संयोग बताया। उन्होंने कहा कि नंदी पर सवार भोलेनाथ जब भूत-पिशाचों के साथ बरात लेकर पहुंचे तो उसे देखकर पर्वतराज और उनके परिजन अचंभित हो गए लेकिन माता पार्वती खुशी से भोलेनाथ को पति के रूप में स्वीकार कर लीं।राम कथा में शिव विवाह प्रसंग भक्तो को सुनाते हुए कथा वाचिका जगत गुरु राम भद्राचार्य महाराज की शिष्या सुरभि जी ने कहा की “हर गिरिजा कर भयऊ बिलाहू । सकल भुवन भरि रहा उछाहु ।। श्रद्धा और विश्वास के मिलन के बाद ही राम का प्रेम प्रगाढ़ होता है । श्रद्धा मां गौरी और विश्वास भगवान शिव के विवाह के उपरांत ही गोस्वामी तुलसी दास ने श्रीराम कथा का सुंदर गान किया है ।भगवान शंकर परम राम भक्त है । इसी लिए भगवान विवाह भी काम की प्रेरणा से नही अपितु राम की प्रेरणा से किया है । इस कथा के दौरान भारी संख्या में श्रोतागण उपस्थित रहे ।कथा विश्राम के बाद आरती उतारकर प्रसाद वितरित किया गया।
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