बलिया (राष्ट्र की परम्परा)।बलिया स्मार्ट मीटर परियोजना एक बार फिर विवादों के घेरे में है। जिले में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य कर रही जीएमआर कंपनी पर कर्मचारियों ने दो महीने से वेतन बकाया रखने का गंभीर आरोप लगाया है। लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद भुगतान न होने से कर्मचारी आक्रोशित हैं और परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। यह मामला अब केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल उठने लगे हैं।
बलिया स्मार्ट मीटर परियोजना के तहत साउथ इंडियन ज़ोन से जुड़ी टीम द्वारा घर-घर जाकर स्मार्ट मीटर इंस्टॉलेशन का काम किया जा रहा है। परियोजना में तकनीकी और फील्ड कर्मचारियों की बड़ी संख्या तैनात है। कर्मचारियों का कहना है कि दिन-रात मेहनत के बावजूद वेतन समय पर नहीं मिल रहा, जिससे रोज़मर्रा के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और इलाज तक प्रभावित हो रहे हैं। कई कर्मचारियों को मजबूरी में उधार लेना पड़ रहा है।
कर्मचारियों के अनुसार वेतन भुगतान को लेकर रितिक राय, संदीप, अवनीश राय और अभिषेक राय सहित जिम्मेदार अधिकारियों से कई बार संपर्क किया गया। हर बार “जल्द भुगतान” का भरोसा मिला, लेकिन ज़मीनी हकीकत नहीं बदली। आदित्य कुमार, अमित कुमार यादव, अमित तिवारी और ईश्वर यादव समेत लगभग 200 कर्मचारियों को अब तक वेतन नहीं मिला है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है।
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काम रोकने की बात पर दबाव और धमकी का आरोप
कुछ कर्मचारियों का आरोप है कि जब उन्होंने वेतन बकाया को लेकर काम रोकने की बात कही, तो उन पर कार्य जारी रखने का दबाव बनाया गया। विरोध करने पर नौकरी से हटाने की धमकी तक दी गई। इस पूरे मामले पर कंपनी प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे कर्मचारियों की नाराज़गी और बढ़ गई है।
प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग तेज
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि सरकारी महत्व की बलिया स्मार्ट मीटर परियोजना में यदि कर्मचारियों को समय पर भुगतान नहीं हो रहा, तो यह गंभीर प्रशासनिक चूक है। श्रम विभाग और जिला प्रशासन से तत्काल जांच और हस्तक्षेप की मांग उठ रही है। लोगों का सवाल है कि जब परियोजना सुचारु रूप से चल रही है, तो कर्मचारियों का मेहनताना क्यों रोका गया?
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे सामूहिक आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। फिलहाल, सबकी निगाहें कंपनी प्रबंधन और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस विवाद का समाधान कब तक करते हैं और बकाया वेतन का भुगतान कब होता है।
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