नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। । देश में LPG सिलिंडर को लेकर पिछले कुछ दिनों से बनी अफरा-तफरी के बीच राहत भरी खबर सामने आई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार एलपीजी सिलिंडर की दैनिक बुकिंग 88.8 लाख से घटकर 77 लाख रह गई है, जो स्थिति में सुधार का संकेत माना जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है।
सरकार के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद ईंधन आपूर्ति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है और देशभर में तेल कंपनियां सामान्य तरीके से वितरण कर रही हैं।
ऑनलाइन एलपीजी बुकिंग में बढ़ोतरी
सरकारी अपडेट के अनुसार एलपीजी की ऑनलाइन बुकिंग 84% से बढ़कर लगभग 87% हो गई है। यह तेल कंपनियों के उस अभियान का असर माना जा रहा है, जिसमें लोगों को डिजिटल माध्यम से सिलिंडर बुक करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे घबराहट में सिलिंडर या ईंधन की अनावश्यक खरीदारी न करें, क्योंकि देश में पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।
तेल रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रहीं
सरकार ने बताया कि देश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है।
भारत पेट्रोल और डीजल उत्पादन में आत्मनिर्भर है और घरेलू मांग को पूरा करने के लिए आयात की आवश्यकता नहीं पड़ रही। तेल विपणन कंपनियों के अनुसार किसी भी पेट्रोल पंप पर ईंधन की कमी की सूचना नहीं मिली है।
30 राज्यों में एलपीजी वितरण व्यवस्था मजबूत
सरकार के अनुसार बिहार, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान सहित कई राज्यों ने सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार गैर-घरेलू एलपीजी सिलिंडरों के आवंटन के आदेश जारी किए हैं।
वाणिज्यिक सिलिंडरों को प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है और अब यह 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध है।
22 राज्यों में कंट्रोल रूम स्थापित
स्थिति पर नजर रखने के लिए 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नियंत्रण कक्ष (Control Room) बनाए गए हैं।
एलपीजी की मांग का दबाव कम करने के लिए होटल, रेस्तरां और आतिथ्य क्षेत्र को केरोसिन और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग की अनुमति दी गई है।
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जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती
राज्य सरकारें पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की जमाखोरी व कालाबाजारी रोकने के लिए कार्रवाई कर रही हैं। आंध्र प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में छापेमारी भी की गई है।
कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार
सूत्रों के अनुसार पश्चिम एशिया संकट से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर 100 डॉलर से अधिक हो गई है।
इसके बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर रखी गई हैं, जिससे तेल विपणन कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है।
रिफाइनरियों पर बढ़ सकता है वित्तीय दबाव
रिपोर्ट के मुताबिक सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां घाटा कम करने के लिए रिफाइनरियों पर कुछ वित्तीय बोझ डालने के विकल्प पर विचार कर रही हैं। इसके तहत रिफाइनरी ट्रांसफर प्राइस (RTP) में बदलाव जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
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