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बिहार से दिल्ली तक सियासी संग्राम-क्या मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण थ्योरी, हिंदुस्तान में इलेक्शन चोरी ?

संसद में हंगामा-एसआईआर प्रक्रिया मतदाता सूची से अपात्र व्यक्तियों को हटाकर चुनाव में पारदर्शिता बढ़ाना है,जो सभी राज्यों में होना ज़रूरी

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर दुनियाँ के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में इन दिनों 21 जुलाई से 21 अगस्त 2025 तक संसद का मानसून सत्र चल रहा है,जो चौथे दिन भी हंगामे में की भेंट चढ़ गया, विशेष गहन पुनरीक्षण पर जोरदार हंगामा चल रहा है, जिसे हिंदुस्तान में इलेक्शन चोरी की संज्ञा दी जा रहा है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र मानता हूं कि,वर्तमान डिजिटल युग में पूर्ण पारदर्शिता हर क्षेत्र में होना चाहिए ताकि भारत के सभी नागरिकों को उस काम की रिपोर्ट दर्शिका पर कोई संदेह नहीं होना चाहिए, कि कोई हेराफेरी गड़बड़ी या अनुचित प्रक्रिया कर किसी को अनुचित लाभ पहुंचाया जा रहा है। यदि किसी को कोई संदेह है तो सांसद सबसे बड़ा प्लेटफार्म है जहां शांतिपूर्वक बात रखी जा सकती है। आज इस विषय पर हम चर्चा इसलिए कर रहे हैं क्योंकिपिछले चार दिनों से संसद के दोनों सदन हंगामा की वजह से बाधित होकर स्थगित हो रहे हैं व काम पूरी तरह से बाधित है। बता दें सांसद की कार्रवाई के प्रति मिनट की कास्ट 2.50 लाख़ रुपए होती है जो इन चार दिनों में करोड़ों में आंकड़ा होगा, जो कर दाताओं की गाड़ी कमाई का अपव्यय हो रहा है, दूसरी और पारदर्शिता की बात करें तो विशेष गहन पुनरीक्षण से लाखों जाली मतदाताओं को हटाया जाना कोई बुरा नहीं है।मेरा मानना है कि यह ऐसा एसआईआर पूरे भारत में पंचायत समिति से लेकर संसद तक हर स्तरपर की जानी चाहिए, ताकि चुनाव में पारदर्शिता व साफ सुथरे की एक संवैधानिक संस्थान की प्रतिष्ठा कायम होगी, क्योंकि ऐसा एसआईआर को लेकर सड़क से संसद तक हंगामा हो रहा है, इसपर जनजागरण करने की आवश्यकता है। चूंकि मतदाता लिस्ट से संवैधानिक रूप से जो पूरी तरह से अपात्र हैं, व लिस्ट में जुड़े हुए हैं तो उनको हटाया जाना ही स्वस्थ लोकतंत्र का असली सम्मान है, जिसे चुनावी विश्वसनीयता भी बढ़ती जाएगी।इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, बिहार से दिल्ली तक सियासी संग्राम, क्या मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण रीसेंट थ्योरी, हिंदुस्तान में इलेक्शन की चोरी है।
साथियों बात अगर हम मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त 2025 चार दिनों से बाधित कामकाज की करें तो, मानसून सत्र के तीसरे दिन भी कोई काम नहीं हो सका है,विपक्ष के भारी हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष बिहार में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और सत्यापन यानी एसआईआर के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया हुआ है।एसआईआर के मुद्दे पर पटना से दिल्ली तक सियासी संग्राम है,बिहार में महागठबंधन की अगुवाई कर रहे,आरज़ेडी के साथ ही विपक्षी इंडिया ब्लॉक की पार्टियां इस मुद्दे पर संसद में चर्चा की मांग कर रही हैं। बिहार विधानसभा में भी काले कपड़े पहनकर विपक्ष प्रदर्शन कर रहा है। एसआईआर के मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों के साथ ही बिहार के भी दोनों सदनों में कार्यवाही बाधित हो रही है। विपक्ष चर्चा की मांग कर रहा है जबकि सरकार का रुख है कि इस पर चर्चा नहीं होगी, चुनाव आयोग की तरफ से सरकार जवाब नहीं दे सकती है।संसद का मानसून सत्र, जैसा कि अपेक्षित था, हंगामेदार रहा, लेकिन बार-बार स्थगित होने की सुर्खियों के पीछे एक वास्तविक लागत छिपी है,संसद के सक्रिय घंटों के दौरान प्रत्येक मिनट के लिए 2.5 लाख रुपये।वर्तमान सत्र सोमवार को शुरू हुआ और दो प्रमुख मुद्दे, जिनके कारण दोनों सदनों में गतिरोध उत्पन्न हुआ है,राज्यसभा की अपेक्षा लोकसभा में हंगामा अधिक रहा, बिहार में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण जिसे विपक्ष ने सत्तारूढ़ गठबंधन को मदद करने का प्रयास बताया है, तथा विपक्षी दलों द्वारा ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा की मांग थी।संसद के प्रत्येक सदन को प्रतिदिन छह घंटे तक उत्पादक होना चाहिए,भोजनावकाश के एक घंटे को छोड़कर और, 2012 में पूर्व संसदीय कार्य मंत्री के अनुसार, सत्र के दौरान संसद को एक मिनट चलाने पर 2.5 लाख रुपये का खर्च आता है, या लोकसभा और राज्यसभा के लिए1.25 लाख रुपये का खर्च आता है। ये आंकड़े अब एक रूढ़िवादी अनुमान हैं, क्योंकि ये एक दशक से भी अधिक पुराने हैं, लेकिन अद्यतन आंकड़ों के अभाव में, हम आगे की गणना के लिए इन्हीं का उपयोग करेंगे। मानसून सत्र में चार दिन हो चुके हैं, यानें हर सदन को 18 घंटे काम करना चाहिए था।हालाँकि, गैर- लाभकारी संस्था पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, स्थगन के कारण राज्यसभा में 4.4 घंटे और लोकसभा में मात्र 0.9 घंटे या 54 मिनट ही काम हुआ है। इसका अर्थ यह है कि व्यवधानों के कारण करदाताओं को राज्यसभा के लिए 10.2 करोड़ रुपये (816 मिनट का नुकसान, 1.25 लाख रुपये से गुणा) तथा लोकसभा के लिए 12.83 करोड़ रुपये (1,026 मिनट का नुकसान,1.25 लाख रुपये से गुणा) का नुकसान हुआ है।
साथियों बात अगर हम बिहार विधानसभा से लेकर दिल्ली मानसून सत्रतक संसद में हंगामें के कारणों की करें तो, बिहार में चल रही विशेष मतदाता सत्यापन प्रक्रिया यानी एसआईआई की प्रक्रिया का पहला चरण पूरा होने में अब केवल दो दिन का समय बचा है. शुक्रवार (25 जुलाई, 2025) को भारतीय चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का पहला चरण समाप्त हो जाएगा औरपुनरीक्षण प्रक्रिया के पहले चरण के तहत 56 लाख मतदाताओं का नाम बिहार मतदाता सूची से कटना तय है।चुनाव आयोग की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बिहार के 56 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम एक अगस्त को आने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं होंगे,बिहार वोटर एसआई आर के तहत सामने आए ताजा आंकड़े-भारतीय चुनाव आयोग की तरफ से बुधवार (23 जुलाई) को जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक,(1)करीब 20 लाख मतदाता मृत पाए गए(2)करीब 28 लाख मतदाता स्थानांतरित हो चुके हैं (3)7 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज हैं (4)1 लाख से ज्यादा ऐसे मतदाता हैं, जिनका पता नहीं चल पाया है
इन आंकड़ों के आधार पर ये कुल संख्या 56 लाख से ज्यादा मतदाताओं की है,हालांकि, भारतीय चुनाव आयोग सत्यापन प्रक्रिया के तहत अब तक बिहार के कुल मतदाता संख्या के 98.01 प्रतिशत का सत्यापन कर चुका है और इनमें से 90.89 प्रतिशत यानी करीब 7.17 करोड़ फॉर्म डिजिटाइज किए जा चुके हैं।चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक,अब आखिरी एक दिन बचा हैं, लेकिन अभी तक करीब दो प्रतिशत यानी करीब 15 लाख मतदाता ऐसे भी हैं, जिन्होंने अभी तक अपना गणना फॉर्म नहीं भरा है,हालांकि, चुनाव आयोग की तरफ नियुक्त बीएलओ राजनीतिक दलों की ओर से नियुक्त बीएलए के साथ मिलकर ऐसी सभी मतदाताओं के बारे में जानकारी जुटाने का काम कर रहे हैं, जिनके बारे में अब तक जानकारी नहीं मिली है. ऐसे में राजनीतिक दलों की ओर से नियुक्त बीएलए की रिपोर्ट के आधार पर चुनाव आयोग ये फैसला करेगा कि किन मतदाताओं के नाम 1 अगस्त को आने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे।
साथियों बात अगर हम मतदाता सूची से बाहर हुए मतदाताओं को आपत्तियां और दावे करने की करें तो मतदाता सूची से 56 लाख ऐसे मतदाता का नाम बिहार की ड्राफ्ट मतदाता सूची से कटना तय है, ये सूची 1 अगस्त को प्रकाशित होगी और अगले एक महीने का वक्त दिया जाएगा ताकि आपत्‍त‍ियां और दावे क‍िए जा सकें, यानी अगर किसी का नाम कट भी जाता है, तो अंतिम सूची में वो शामिल हो सकता है, अगर वो मतदाता होने का दावा साबित कर दे, बिहार में एसआईआर का पहला चरण अगले दो दिनों में पूरा होने वाला है यानी नामांकन फॉर्म को मतदाताओं से प्राप्त करने की आखिरी तारीख 25 जुलाई है, ऐसे में एक बात साफ है की 56 लाख का आंकड़ा हो या 1 लाख का, इसके बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। बिहार विधानसभा में भी काले कपड़े पहनकर विपक्ष प्रदर्शन कर रहा है।एसआई आर के मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों के साथ ही बिहार के भी दोनों सदनों में कार्यवाही बाधित हो रही है. विपक्ष चर्चा की मांग कर रहा है जबकि सरकार का रुख है कि इस पर चर्चा नहीं होगी, चुनाव आयोग की तरफ से सरकार जवाब नहीं दे सकती है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि बिहार से दिल्ली तक सियासी संग्राम- क्या मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण थ्योरी, हिंदुस्तान में इलेक्शन चोरी? संसद में हंगामा- एसआईआर प्रक्रिया मतदाता सूची से अपात्र व्यक्तियों को हटाकर चुनाव में पारदर्शिता बढ़ाना है जो सभी राज्यों में होना ज़रूरी,संसद के पिछले कुछ सत्रों में मतदाताओं सहित पूरी दुनियाँ देख रही है,सबसे बड़े लोकतंत्र की गरिमा कैसे तार तार हो रही है।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

Editor CP pandey

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