नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। दिल्ली हाई कोर्ट में पीएम केयर्स फंड को लेकर चल रहे एक महत्वपूर्ण मामले ने देश में पारदर्शिता बनाम निजता की बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है। मंगलवार (13 जनवरी, 2026) को सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि पीएम केयर्स फंड भले ही सरकारी या सार्वजनिक संस्था क्यों न हो, उसे भी सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत निजता का अधिकार प्राप्त है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी संस्था का पब्लिक अथॉरिटी होना यह नहीं दर्शाता कि उसकी हर जानकारी स्वतः ही जनता के सामने उजागर कर दी जाए।
सामाजिक कार्यकर्ता गिरिश मित्तल की याचिका से जुड़ा मामला
यह मामला मुंबई के सामाजिक कार्यकर्ता गिरिश मित्तल द्वारा दायर अपील से जुड़ा है। मित्तल ने RTI कानून के तहत आयकर विभाग से पीएम केयर्स फंड को दी गई टैक्स छूट से संबंधित दस्तावेज मांगे थे।
उन्होंने यह जानना चाहा था कि—
• पीएम केयर्स फंड ने टैक्स छूट पाने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जमा किए
• किन अधिकारियों ने इन दस्तावेजों पर क्या टिप्पणियां कीं
• 2019-20 के दौरान किन संस्थाओं को टैक्स छूट दी गई या किन्हें इनकार किया गया
केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने आयकर विभाग को यह जानकारी देने का आदेश दिया था, लेकिन आयकर विभाग ने इस आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी।
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सिंगल जज बेंच ने CIC का आदेश किया था रद्द
दिल्ली हाई कोर्ट की सिंगल जज बेंच ने CIC के आदेश को रद्द करते हुए कहा था कि आयकर अधिनियम की धारा 138 के तहत करदाताओं से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। अदालत ने माना कि CIC को ऐसी जानकारी साझा करने का अधिकार नहीं है।
इस फैसले के खिलाफ गिरिश मित्तल ने हाई कोर्ट में अपील दायर की। उनके वकील ने दलील दी कि RTI कानून की धारा 8(1) केवल किसी व्यक्ति की निजता की रक्षा के लिए है, न कि पीएम केयर्स जैसे सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट के लिए। वकील ने कहा कि यह फंड जनता के दान से बना है, इसलिए इसकी कार्यप्रणाली पारदर्शी होनी चाहिए।
डबल बेंच की अहम टिप्पणी
मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट की डबल बेंच ने संकेत दिया कि कोई संस्था यदि सरकारी भी हो, तब भी उसकी कुछ जानकारी निजता के दायरे में आ सकती है। कोर्ट ने कहा कि केवल सार्वजनिक कार्य करने से कोई संस्था अपनी पूरी गोपनीयता नहीं खो देती।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी 2026 को होगी। इस दौरान यह तय किया जाएगा कि पारदर्शिता और निजता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए और क्या पीएम केयर्स फंड से जुड़ी टैक्स छूट की जानकारी आम जनता को दी जानी चाहिए या नहीं।
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