Categories: Newsbeat

किसान, संस्कृति और संघर्ष: प्रेमचंद की रचनाओं में ग्रामीण भारत

हिन्दी साहित्य के यथार्थवादी युग की पहचान बने मुंशी प्रेमचंद ने भारतीय ग्राम्य जीवन को जिस गहराई और संवेदनशीलता से अभिव्यक्त किया, वह उन्हें भारतीय साहित्य का “लोक-लेखक” बनाता है। उनकी कलम से उपजा गाँव सिर्फ कथा का परिवेश नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का जीवंत चित्र है।
प्रेमचंद की रचनाओं में गाँव का जीवन अपनी सम्पूर्ण सादगी, संघर्ष और आत्मसम्मान के साथ उपस्थित है। “गोदान” के होरी में किसान की पीड़ा, ईमानदारी और जीवटता दिखती है। गरीबी, शोषण और विषमताओं से जूझता किसान उनके साहित्य का केन्द्र बन गया। उन्होंने दिखाया कि भारतीय किसान केवल दुख का पात्र नहीं, बल्कि अदम्य श्रम और नैतिक बल का प्रतीक है।
प्रेमचंद ने ग्राम्य जीवन की पृष्ठभूमि में सामाजिक विषमताओं और आर्थिक अन्याय का गहरा चित्र खींचा। “रंगभूमि” और “निर्मला” जैसी रचनाएँ वर्गीय असमानता, ज़मींदारी शोषण और सामाजिक कुरीतियों पर करारा प्रहार करती हैं। उन्होंने साहित्य को समाज सुधार का माध्यम बनाया और व्यवस्था के प्रति जागरूक दृष्टि दी।
प्रेमचंद की ग्रामीण स्त्रियाँ, धनिया, झुनिया, सोना और निर्मला, त्याग, संघर्ष और आत्मसम्मान की प्रतीक हैं। उन्होंने स्त्री को केवल करुणा का विषय नहीं, बल्कि चेतना और शक्ति का स्रोत दिखाया। धनिया जैसी स्त्री उनके साहित्य में भारतीय नारी की रीढ़ बनकर उभरती है।
प्रेमचंद ने गाँव की बोली, मुहावरों और जीवन-संस्कारों को सहज रूप में प्रस्तुत किया। उनके संवादों में अवधी और भोजपुरी की मिठास है। यही भाषा उनकी कहानियों को आम जन तक पहुँचाती है और पाठक को अपनेपन का अनुभव कराती है।
उनके पात्र संघर्ष में टूटते नहीं, बल्कि नैतिकता का सहारा लेकर आगे बढ़ते हैं। उन्होंने यथार्थ के बीच भी आदर्श को जिया और दिखाया कि जीवन की सच्ची शक्ति ईमानदारी, परिश्रम और आत्मबल में निहित है।
उनके उपन्यास “गोदान”, “प्रेमाश्रम”, “कर्मभूमि” और “रंगभूमि” ग्रामीण जीवन की सच्ची झांकी प्रस्तुत करते हैं। वहीं “पूस की रात”, “कफन”, “ईदगाह” और “पंच परमेश्वर” जैसी कहानियाँ गाँव की संवेदना, करुणा और लोक चेतना की प्रतिनिधि हैं।
प्रेमचंद ने अपने साहित्य के माध्यम से भारतीय गाँव को आवाज़ दी। उनके शब्दों में किसान का दर्द, स्त्री की अस्मिता और समाज की जमीनी सच्चाइयाँ बोलती हैं। आज भी जब हम ग्रामीण भारत को समझना चाहते हैं, तो प्रेमचंद की रचनाएँ सबसे सशक्त दस्तावेज़ के रूप में हमारे सामने आती हैं।

इसे भी पढ़ें – अमेरिकी सीनेट ने भारत में अमेरिका के अगले राजदूत के रूप में सर्जियो गोर को नामित किया

rkpnews@desk

Recent Posts

खिचड़ी मेले को लेकर सीएम योगी का समीक्षा बैठक

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l शनिवार को गोरखनाथ मंदिर के सभाकक्ष में सीएम योगी ने अधिकारियों संग…

2 hours ago

सिकंदरपुर–बालूपुर मार्ग पर बड़ा हादसा, नीलगाय से टकराकर बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)l सिकंदरपुर बालूपुर मुख्य मार्ग पर हरदिया गांव के पास शनिवार की शाम…

2 hours ago

जिलाधिकारी के निर्देश पर ददरी मेले में विशेष सरकारी प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)l ऐतिहासिक ददरी मेला इस वर्ष भी अपनी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक उत्सवधर्मिता…

2 hours ago

महराजगंज का सबसे बड़ा युवा महोत्सव—इनोवेशन और लोककला की चमक से जगमगाया जनपद स्तरीय युवा उत्सव

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जिले में शनिवार का दिन युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और नवाचार के…

2 hours ago

सिकंदरपुर–बालूपुर मार्ग पर बड़ा हादसा: नीलगाय से टकराकर बाइक सवार बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। सिकंदरपुर–बालूपुर मुख्य मार्ग पर हरदिया गांव के पास शनिवार शाम एक…

3 hours ago

खिचड़ी मेले को लेकर सीएम योगी का समीक्षा बैठक

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। शनिवार को गोरखनाथ मंदिर के सभाकक्ष में सीएम योगी ने अधिकारियों…

3 hours ago