बलिया(राष्ट्र की परम्परा)
तुम लड़की हो पराया धन तुम्हें एक ना एक दिन दूसरे के घर जाना है ज्यादा हंसना नहीं धीरे बोलो अच्छा तरीका सीखो, तुम्हें दूसरे के घर जाना है। अगर कोई लड़की अकेले बाहर आती जाती है तो लोग तंज कसते हैं। उसकी जिंदगी के सब जिम्मेदार बन जाते हैं और यदि उसकी पढ़ाई के लिए फीस कम पड़ जाए तो यह जिम्मेदार व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी भूल जाते हैं। घर की रसोई में बेटियो को बचपन से ही मां का हाथ बटाने के लिए कहा जाता है।उनसे कहा जाता है कि तुम्हारे हाथ की सब्जी बहुत अच्छी लगती है तुम्हारे हाथ की रोटी बहुत अच्छी लगती है। यह सब कह कर उसको रसोई तक सीमित कर दिया जाता है ताकि वह रसोई का काम मन लगा कर करें। पैदा होते ही बेटियों को पराया धन कहकर उसके मन में अपनों से दूरी बनाई जाती है पिता के घर में पिता के अधीन थोड़ी बड़ी हुई तो भाई के अधीन शादी के बाद पति के अधीन और बुढ़ापे में बेटे के अधीन क्या यही नारी का अस्तित्व है जी नहीं नारी सामर्थवान और शक्तिवान है। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जहां बेटियों ने अपना परचम ना लहराया हो। इसलिए बेटियों के प्रति सकारात्मक और सार्थक सोच बनाए।
कुछ परिवारों में तो बेटी को ज्यादा पढ़ाना भी नहीं चाहते। उनकी मानसिकता है कि आगे चलकर घर ही तो संभालना है। पढ़ने का क्या फायदा रूढ़िवादी विचारधारा के लोगों के लिए बेटी एक जिम्मेदारी से ज्यादा और कुछ नहीं है।एक ओर नारी को शक्ति स्वरूपा मानते हैं। और दूसरी तरफ दूषित मानसिकता से ग्रसित लोग। ऐसी अनेक जटिल परिस्थितियों का सामना करके नारी जाति अपने अस्तित्व को सुरक्षित रखने के लिए जूझ रही है। क्या वह अपना अस्तित्व सुरक्षित रखने में सफल हो पाएगी।
सीमा त्रिपाठी शिक्षिका
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