ट्रंप के साथ लंच करने जा रहे पाक सेना प्रमुख असीम मुनीर, भारत को कूटनीतिक झटका? कांग्रेस ने मोदी पर साधा निशाना

वॉशिंगटन/नई दिल्ली (एजेंसी)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के साथ व्हाइट हाउस के कैबिनेट रूम में लंच करेंगे। राष्ट्रपति के सार्वजनिक कार्यक्रम में इसकी पुष्टि की गई है। यह मुलाकात ऐसे समय पर हो रही है जब अमेरिका ने मुनीर को आधिकारिक रूप से अमेरिकी सेना की 250वीं वर्षगांठ में आमंत्रित करने से इनकार कर दिया था।

हालांकि पाक सेना प्रमुख की अमेरिका यात्रा को ‘अमेरिकी सेना दिवस’ से औपचारिक तौर पर अलग बताया जा रहा है, लेकिन इसके रणनीतिक मायने खंगाले जा रहे हैं। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, असीम मुनीर की यह यात्रा अमेरिका-पाकिस्तान के बीच सैन्य और रणनीतिक रिश्तों को नई धार देने की मंशा से की जा रही है।

भारत में उठे सवाल, कांग्रेस ने सरकार को घेरा
असीम मुनीर की व्हाइट हाउस में मेजबानी पर भारत में तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बुधवार को सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “भारतीय कूटनीति बिखर रही है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी पूरी तरह चुप हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि असीम मुनीर वही व्यक्ति हैं जिनकी उकसावेभरी टिप्पणियों का सीधा संबंध अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमलों से था, और अब उन्हें अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ भोज के लिए आमंत्रित किया गया है।

जयराम रमेश ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ट्रंप द्वारा जी-7 सम्मेलन को बीच में छोड़ देना और पीएम मोदी को “गले न लगाना” किसी गहरे संकेत का हिस्सा है? उन्होंने यह दावा भी किया कि ट्रंप ने पहले कई बार कहा है कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच “युद्ध विराम” कराया है, जो भारत के ऑपरेशन ‘सिंदूर’ को कमजोर करने की कोशिश हो सकती है।

‘हाउडी मोदी’ से ‘नमस्ते ट्रंप’ तक, तिहरा झटका?
कांग्रेस प्रवक्ता ने आगे कहा कि अमेरिकी सेन्ट्रल कमांड के जनरल माइकल कुरिल्ला ने हाल में पाकिस्तान को आतंकवाद विरोधी अभियानों में एक “अभूतपूर्व साझेदार” बताया था, जो भारत के लिए चिंता का विषय है।

उन्होंने कटाक्ष किया कि ‘हाउडी मोदी’ से लेकर ‘नमस्ते ट्रंप’ तक की कूटनीति को अब तिहरा झटका लग रहा है – ट्रंप का पाक सेना प्रमुख को भोज पर बुलाना, मोदी से दूरी बनाना और पाकिस्तान को “साझेदार” बताना।

भविष्य की दिशा क्या होगी?
विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम से दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन को लेकर भारत को सतर्क रहना होगा। अमेरिकी प्रशासन की बदलती प्राथमिकताएं और पाकिस्तान से बढ़ता सामरिक संवाद भारत के लिए चिंताजनक संकेत हो सकते हैं।

Editor CP pandey

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