लेखक: गोविन्द प्रताप मौर्य। राष्ट्र की परम्परा
अक्टूबर का महीना दुनियाभर में ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह (Breast Cancer Awareness Month) के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2026 की थीम ‘Every Story is Unique, Every Journey Matters’ यानी ‘हर कहानी अनूठी है, हर सफर महत्वपूर्ण है’ है। इस अभियान का उद्देश्य महिलाओं को स्तन कैंसर के प्रति जागरूक करना, समय पर जांच के महत्व को समझाना और बीमारी से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना है।आज के दौर में बड़ी संख्या में महिलाएं आईटी कंपनियों, बीपीओ, अस्पतालों, कॉल सेंटरों और अन्य संस्थानों में नाइट शिफ्ट में काम करती हैं। काम की जरूरत के चलते उन्हें रातभर जागना और दिन में सोना पड़ता है। लंबे समय तक इस तरह की दिनचर्या अपनाने से नींद, शरीर की जैविक घड़ी और संपूर्ण स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।इसी बीच कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में लंबे समय तक रात की शिफ्ट में काम करने और ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम के बीच संभावित संबंध की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं को स्तन कैंसर का खतरा अधिक होता है? आइए, उपलब्ध शोध और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर इसे समझते हैं।
रात में काम करने और ब्रेस्ट कैंसर के बीच क्या है संबंध?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी (IARC) ने रात की शिफ्ट में काम करने को संभावित कैंसरकारी जोखिमों की श्रेणी में रखा है। वर्ष 2019 में प्रकाशित IARC के मूल्यांकन के अनुसार, रात की शिफ्ट में काम करना मनुष्यों के लिए संभवतः कैंसरकारी (Probably carcinogenic to humans) है। इसे ग्रुप 2A में रखा गया है।वैज्ञानिकों के अनुसार, रात में लंबे समय तक जागने और दिन में सोने से शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी यानी सर्केडियन रिदम प्रभावित हो सकती है। शरीर की यह आंतरिक घड़ी नींद-जागने के चक्र, हार्मोन के स्राव और कई शारीरिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।रात में रोशनी के संपर्क में रहने और नींद के चक्र में बदलाव से मेलाटोनिन हार्मोन के सामान्य स्राव पर भी असर पड़ सकता है। इस कारण वैज्ञानिकों ने जैविक घड़ी में गड़बड़ी और कुछ प्रकार के कैंसर के बीच संभावित संबंध की जांच की है।हालांकि, यह समझना बेहद जरूरी है कि रात की शिफ्ट में काम करने और कैंसर के बीच संबंध मिलने का अर्थ यह नहीं है कि नाइट शिफ्ट करने वाली हर महिला को ब्रेस्ट कैंसर होगा। इस विषय पर वैज्ञानिक शोध जारी है और जोखिम का स्तर व्यक्ति की परिस्थितियों तथा अन्य कारकों के अनुसार अलग हो सकता है।
क्या कहती हैं ब्रेस्ट कैंसर पर हुई रिसर्च?
रात की शिफ्ट और स्तन कैंसर के संबंध को समझने के लिए अलग-अलग वर्षों में कई वैज्ञानिक अध्ययन किए गए हैं। वर्ष 2022 में प्रकाशित एक मेटा-विश्लेषण में 33 अध्ययनों और लगभग 43 लाख प्रतिभागियों के आंकड़ों का आकलन किया गया था। इसके निष्कर्षों में नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं में स्तन कैंसर के जोखिम में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि का संकेत बताया गया।हालांकि, इस तरह के अध्ययनों के नतीजों की व्याख्या सावधानी से करना जरूरी है। विभिन्न शोधों में काम के घंटों, रात की शिफ्ट की अवधि, शिफ्ट की आवृत्ति और प्रतिभागियों की जीवनशैली में अंतर रहा है। कुछ बड़े अध्ययनों में नाइट शिफ्ट और ब्रेस्ट कैंसर के बीच स्पष्ट संबंध नहीं मिला है।वर्ष 2024 में प्रकाशित एक समीक्षा में भी इस विषय से संबंधित उपलब्ध शोध का मूल्यांकन किया गया। इसमें लंबे समय तक या बार-बार रात की शिफ्ट में काम करने और स्तन कैंसर के बीच संभावित संबंध के संकेतों पर चर्चा की गई। इसके बावजूद, इस संबंध की प्रकृति और वास्तविक जोखिम को पूरी तरह समझने के लिए अभी और उच्च गुणवत्ता वाले शोध की जरूरत है।
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है: यदि किसी अध्ययन में जोखिम 20 प्रतिशत अधिक पाया जाता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि हर पांच में से एक महिला को ब्रेस्ट कैंसर होगा। यह किसी अध्ययन में तुलना के आधार पर सामने आया सापेक्ष जोखिम हो सकता है, न कि प्रत्येक महिला के कैंसर होने की निश्चित संभावना।
नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाएं अपनी सेहत का ध्यान कैसे रखें?
रात की शिफ्ट में काम करना कई महिलाओं की नौकरी और आर्थिक जरूरतों का हिस्सा है। ऐसे में जरूरी है कि वे अपनी दिनचर्या में कुछ व्यावहारिक बदलाव करके नींद और स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
1. नींद का नियमित समय तय करेंजहां तक संभव हो, रोजाना सोने और जागने का समय नियमित रखें। वयस्कों को सामान्यतः 7 से 9 घंटे की नींद की जरूरत होती है। पर्याप्त नींद शरीर की रिकवरी, एकाग्रता और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
2. सोने के कमरे में अंधेरा रखेंनाइट शिफ्ट के बाद दिन में सोते समय कमरे में मोटे पर्दों या ब्लैकआउट कर्टेन का इस्तेमाल करें। इससे बाहर की रोशनी कम होगी और नींद लेने में मदद मिल सकती है।
3. शोर से बचने की व्यवस्था करेंदिन के समय घर और आसपास की गतिविधियों के कारण नींद टूट सकती है। इसलिए शांत वातावरण बनाने की कोशिश करें। जरूरत पड़ने पर सुरक्षित तरीके से ईयरप्लग का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
4. खानपान और शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देंसंतुलित आहार लें, नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करें और धूम्रपान से बचें। शराब का सेवन भी कैंसर के जोखिम से जुड़ा है, इसलिए इससे दूरी रखना बेहतर है। कैफीन का सेवन सोने से कई घंटे पहले बंद करने की कोशिश करें।
5. नींद की समस्या को नजर अंदाज न करेंयदि लंबे समय से नींद नहीं आ रही है, दिन में अत्यधिक थकान रहती है या काम के दौरान नींद आने की समस्या होती है, तो डॉक्टर से सलाह लें। लगातार नींद की कमी को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
ब्रेस्ट कैंसर के इन लक्षणों को न करें नजर अंदाज
स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए शरीर में होने वाले बदलावों के प्रति जागरूक रहना महत्वपूर्ण है। निम्नलिखित लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय जांच करवाएं:-
स्तन या बगल में नई गांठ या सूजन महसूस होना।
– स्तन के आकार या बनावट में असामान्य बदलाव आना।
– स्तन की त्वचा में गड्ढे पड़ना, सिकुड़न या लालिमा दिखाई देना।
– निप्पल का अंदर की ओर मुड़ना या उसमें नया बदलाव होना।
– निप्पल से अपने आप असामान्य, खासकर खून मिला, स्राव निकलना।
इन लक्षणों का अर्थ हमेशा कैंसर होना नहीं है, लेकिन इनकी जांच कराना जरूरी है। गांठ या अन्य बदलाव होने पर अगली नियमित जांच का इंतजार न करें।
ब्रेस्ट कैंसर की जांच कब करानी चाहिए?
स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग उम्र, पारिवारिक इतिहास, व्यक्तिगत जोखिम और स्थानीय चिकित्सकीय दिशानिर्देशों के अनुसार तय की जाती है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार मैमोग्राफी या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं। जिन महिलाओं के परिवार में स्तन या डिम्बग्रंथि कैंसर का इतिहास रहा है, उन्हें अपने व्यक्तिगत जोखिम के बारे में चिकित्सक से चर्चा करनी चाहिए।यह भी ध्यान रखें कि केवल नाइट शिफ्ट में काम करने के कारण किसी महिला को कैंसर होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसी तरह, कोई लक्षण न होने का अर्थ भी यह नहीं है कि स्क्रीनिंग की जरूरत कभी नहीं पड़ेगी।
निष्कर्ष:नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं के लिए नींद, संतुलित जीवनशैली और नियमित स्वास्थ्य जांच पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिक शोध में लंबे समय तक रात की शिफ्ट में काम करने और ब्रेस्ट कैंसर के बीच संभावित संबंध के संकेत मिले हैं, लेकिन इस विषय पर अभी और शोध की आवश्यकता है।महिलाओं को डरने के बजाय जागरूक रहने, शरीर में होने वाले असामान्य बदलावों को गंभीरता से लेने और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेने पर ध्यान देना चाहिए। समय पर जांच और सही जानकारी स्तन कैंसर से जुड़े जोखिमों को समझने और उचित कदम उठाने में मदद कर सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता और सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे डॉक्टर की सलाह, निदान या उपचार का विकल्प न समझें। स्तन में गांठ, निप्पल से असामान्य स्राव या अन्य चिंताजनक लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सक से संपर्क करें।
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