नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की प्रशंसा करने पर कड़ा विरोध जताया है। शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओवैसी ने इसे भारत के स्वतंत्रता संग्राम का “घोर अपमान” बताया और आरोप लगाया कि आरएसएस ने कभी आज़ादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया।
ओवैसी ने कहा, “प्रधानमंत्री द्वारा आरएसएस की प्रशंसा करना गलत है। आरएसएस ने हमेशा समावेशी राष्ट्रवाद का विरोध किया और स्वतंत्रता सेनानियों, जिनमें गांधी भी शामिल हैं, से अंग्रेजों से भी ज़्यादा नफ़रत की।” उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस की विचारधारा भारतीय संविधान के खिलाफ है और यह देश में नफ़रत फैलाने का काम करता है।
उन्होंने सवाल किया कि स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख आंदोलनों – असहयोग आंदोलन, सत्याग्रह, रौलट एक्ट विरोध, सविनय अवज्ञा, भारत छोड़ो आंदोलन और नौसेना विद्रोह – में आरएसएस की कोई भूमिका क्यों नहीं रही।
हिंदू महासभा के नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी का ज़िक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि उनकी राजनीतिक भूमिका और पाकिस्तान प्रस्ताव पेश करने वाले फ़ज़लुल हक़ के साथ काम करने के ऐतिहासिक तथ्य पर भी विचार होना चाहिए।
ओवैसी ने दोहराया कि उनकी पार्टी दार्शनिक रूप से भाजपा के विरोध में है और प्रधानमंत्री द्वारा “नफ़रत फैलाने वाले संगठन” की प्रशंसा करना स्वीकार्य नहीं है।
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