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मेडिकल कॉलेज कोरियावास के नामकरण का विरोध अनुचित

निंदनीय है महर्षि च्यवन का अपमान- डॉ. मानव

नारनौल/हरियाणा(राष्ट्र की परम्परा)। ग्राम पंचायत, कोरियावास ने मेडिकल कॉलेज के लिए बिना शर्त उनासी एकड़ जमीन देकर बहुत ही सराहनीय कार्य किया था, लेकिन अब पंचायत सदस्यों तथा ग्रामवासियों द्वारा महर्षि च्यवन के नाम पर मेडिकल कॉलेज के नामकरण का विरोध करना तथा उनके नाम का बोर्ड न लगने देना अनुचित ही नहीं, दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण भी है। यह कहना है मनुमुक्त ‘मानव’ मेमोरियल ट्रस्ट, नारनौल के चीफ ट्रस्टी डॉ. रामनिवास ‘मानव’ का। डॉ. ‘मानव’ ने प्रश्न किया है कि जब जमीन बिना शर्त दी गई थी, तो अब काॅलेज का नामकरण ग्राम पंचायत की सलाह पर न करने की बात कहकर विरोध क्यों? डॉ० ‘मानव’ ने बताया कि हरियाणा में कुल ग्यारह मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें से छह सरकारी और पांँच गैर-सरकारी हैं। इन सभी काॅलेजों का नामकरण जिन विभूतियों के नाम पर किया गया है, उनमें से किसी का भी चिकित्सा या चिकित्सा विज्ञान से कभी कोई संबंध नहीं रहा। मेडिकल कॉलेज, कोरियावास हरियाणा का बारहवांँ और सातवांँ सरकारी मेडिकल कॉलेज होने‌ के साथ प्रदेश का पहला ऐसा मेडिकल कॉलेज है, जिसका नामकरण एक महान चिकित्सक महर्षि च्यवन के नाम पर किया गया है। कोरियावास ग्राम-वासियों को इस बात पर गर्व होना चाहिए कि राज्य सरकार ने उनके गांँव की जमीन पर बनने वाले काॅलेज का नामकरण महर्षि च्यवन के नाम पर किया है, जिन्होंने च्यवनप्राश जैसे रसायन का आविष्कार कर, पूरी मानवता का कल्याण तो किया ही है, कोरियावास की निकटवर्ती पहाड़ी ढोसी को अपनी तपस्या-स्थली बनाकर, इस क्षेत्र के साथ देश-प्रदेश का नाम भी पूरे विश्व में रोशन किया है। डॉ० ‘मानव’ ने स्पष्ट किया कि मनुमुक्त ‘मानव’ मेमोरियल ट्रस्ट के सुझाव पर मेडिकल कॉलेज, कोरियावास का नामकरण महर्षि च्यवन के नाम पर करने को तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर की सरकार ने 16 मार्च, 2023 को स्वीकृति प्रदान कर दी थी तथा राज्यपाल से स्वीकृति मिलने के बाद 12 फरवरी, 2024 को गजट के माध्यम से इसे अधिसूचित भी कर दिया गया। अब इसे बदलना संभव नहीं है। अतः डॉ. ‘मानव’ ने ग्राम पंचायत, कोरियावास के सभी सदस्यों और ग्रामवासियों से अनुरोध किया है कि वे सरकार के इस सर्वथा उचित निर्णय को स्वीकार कर महर्षि च्यवन के प्रति अपनी श्रद्धा निवेदित करें। उन्होंने कहा कि अब मेडिकल कॉलेज के नामकरण का विरोध करना अनुचित और महर्षि च्यवन का अपमान है। उल्लेखनीय है कि इसके साथ डॉ. ‘मानव’ ने नाम के स्वीकृति-पत्र और गजट नोटिफिकेशन की प्रति भी जारी की है।

Karan Pandey

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