एक राष्ट्र एक चुनाव से बढ़ेगा मतदान का प्रतिशत

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।एक राष्ट्र एक चुनाव से मतदान का प्रतिशत तो बढ़ेगा ही बढ़ेगा यह मानव श्रम और धन के अपव्यय को भी कम करेगा । ऐसा जो भ्रम फैलाया जा रहा है कि इससे राष्ट्रीय पार्टियों को फायदा होगा तो यह एक तरह से भारतीय मतदाताओं के बुद्धिमता पर प्रश्न उठाने जैसा है मतदाता यह जानता है कि राष्ट्रीय,प्रांतीय और स्थानीय स्तर पर उसका हित कैसे सुरक्षित होगा उक्त बातें सन्त विनोबा स्नातकोत्तर महाविद्यालय के सभागार मे विधि विभाग द्वारा आयोजित एक राष्ट्र-एक चुनाव विषयक गोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता भारत सरकार के विधि सचिव राजीव मणि त्रिपाठी ने कही । उन्होंने कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र मे चुनाव की जटिलता और लगने वाले समय में संसाधनों और समय मे होने वाले अपव्यय को रोका जा सकता है भारत मे अब तक 400 से अधिक चुनाव हो चुके है जिसमे प्रत्येक चुनाव अपने स्थान पर पूरी तरह सरकारी मशीनरी और व्यवस्था को व्यस्त रखता है जिससे जनसामान्य के आवश्यक कार्यों पर प्रभाव पड़ता रहा है ।ऐसी स्थिति से बचने के लिये भारत सरकार वर्ष 2034 के आम चुनाव से भारत मे एक समय पर चुनाव लोकसभा,विधानसभा चुनावों को कराने के पक्ष मे है। ईवीएम और जनता के प्रति जवाबदेही के सम्बन्धित विधि छात्रों की जिज्ञासाओं के जवाब में उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 344 चुनाव आयोग को चुनाव की शुचिता और पवित्रता को बनाये रखने के लिए विशेषाधिकार देता है जिसमे समय समय पर बहुमत नहीं प्राप्त दलों द्वारा ईवीएम, चुनाव की प्रकिया,पारदर्शिता पर उठाए प्रश्नों पर आयोग सार्वजनिक मंचों और सर्वोच्च न्यायालय तक अपने आप को सिद्ध किया है।विश्व की सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश कम से कम संसाधनों का प्रयोग करते हुए जब विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक चुनाव प्रकिया को सम्पन्न करेगा तब यह विश्व के अन्य देशों के लिए अनुकरणीय होगा। गोष्ठी के पूर्व में मुख्य अतिथि द्वारा मॉ सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि और दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम की शुरुआत की गई। महाविद्यालय के प्राचार्य द्वारा अंगवस्त्र और स्मृतिचिन्ह भेंट कर मुख्य अतिथि का स्वागत और सम्मान किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहें महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो अर्जुन मिश्र ने अतिथि का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रचार्य ने कहा कि जनसामान्य और अन्य दलों ने भी एक राष्ट्र एक चुनाव के पक्ष मे हैं कुछ संविधानविद भी हालाँकि इसमें कुछ कमियों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए उसे लागू करने की बात कह रहे हैं यह लम्बे समय से मंथन किया हुआ विषय है। आजादी के बाद देश में गणतंत्र का विदेशी पौधे का रोपण किया गया उस पौधे के लिए भारत मे मिला अनुकूल वातावरण इसे आगे बढ़ाया गया जबकि हमारे साथ के ही देशों ने इसे सम्भाल नही पाया इसमे अगर सबसे बड़ा योगदान किसी का है तो वह भारत की जनता का है चुनाव की नयी व्यवस्था धन और मानव श्रम के व्यय को रोकने के साथ ही सुरक्षा बलों के थकान को कम करने वाली भी होगी। कार्यक्रम का संचालन विधि विभाग की सहायक आचार्य उर्वशी पचेरिया ने किया ।कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ विवेक मिश्रा,डॉ अभिनव चौबे, डॉ मंतोष मौर्य,डॉ पुनीत सिंह, डॉ विद्यावती डॉ राजेश मिश्रा डॉ उमेश दूबे डॉ निखिल गौतम महाविद्यालय के कर्मचारियों सहीत विधि विभाग और एन सी सी के छात्र उपस्थित रहें।

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