14 जनवरी के ऐतिहासिक निधन: मुनव्वर राणा, सुरजीत सिंह बरनाला और एडमंड हैली — साहित्य, राजनीति और विज्ञान की अमर विरासत
14 जनवरी 2024 – मुनव्वर राणा (भारतीय उर्दू कवि)
मुनव्वर राणा आधुनिक उर्दू साहित्य के उन बड़े नामों में गिने जाते हैं, जिन्होंने आम आदमी की भावनाओं, विशेषकर मां, घर, रिश्तों और विस्थापन के दर्द को अपनी शायरी का केंद्र बनाया। उनका जन्म 26 नवंबर 1952 को उत्तर प्रदेश के रायबरेली ज़िले में हुआ था। उन्होंने मुशायरों के मंच से उर्दू शायरी को जन-जन तक पहुंचाया और साहित्य को अभिजात वर्ग से निकालकर आम लोगों की संवेदना से जोड़ा।
उनका काव्य संग्रह ‘शहदाबा’ अत्यंत चर्चित रहा, जिसके लिए उन्हें वर्ष 2014 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मुनव्वर राणा की भाषा सरल, भावनात्मक और सीधी दिल को छूने वाली थी। 14 जनवरी 2024 को उनके निधन से उर्दू साहित्य को अपूरणीय क्षति हुई। उनका योगदान भारतीय साहित्य और सांस्कृतिक चेतना में सदैव स्मरणीय रहेगा।
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14 जनवरी 2017 – सुरजीत सिंह बरनाला (पूर्व मुख्यमंत्री, पंजाब)
सुरजीत सिंह बरनाला भारतीय राजनीति के एक सम्मानित और संतुलित नेता माने जाते थे। उनका जन्म 25 फरवरी 1925 को पंजाब के बरनाला ज़िले में हुआ था। वे शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता रहे और वर्ष 1985 से 1987 तक पंजाब के मुख्यमंत्री पद पर कार्य किया।
बरनाला का कार्यकाल पंजाब के लिए राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण समय में रहा, जब राज्य आंतरिक अशांति के दौर से गुजर रहा था। इसके बावजूद उन्होंने संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संवाद को प्राथमिकता दी। वे बाद में तमिलनाडु के राज्यपाल भी नियुक्त किए गए। 14 जनवरी 2017 को उनके निधन से भारतीय राजनीति ने एक अनुभवी, सुलझे हुए और सिद्धांतवादी नेता को खो दिया।
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14 जनवरी 1742 – एडमंड हैली (प्रसिद्ध खगोलशास्त्री)
एडमंड हैली विश्व विज्ञान इतिहास के महान खगोलशास्त्रियों में से एक थे। उनका जन्म 8 नवंबर 1656 को हैगरस्टन, लंदन (इंग्लैंड) में हुआ था। वे विशेष रूप से हैली धूमकेतु (Halley’s Comet) की गणना और भविष्यवाणी के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने सिद्ध किया कि यह धूमकेतु एक निश्चित अवधि में पृथ्वी के पास से गुजरता है।
एडमंड हैली ने आइज़ैक न्यूटन के प्रसिद्ध ग्रंथ प्रिंसिपिया के प्रकाशन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे रॉयल सोसाइटी के सक्रिय सदस्य रहे और खगोल विज्ञान, भूगोल व मौसम विज्ञान में उल्लेखनीय योगदान दिया। 14 जनवरी 1742 को उनके निधन के बावजूद, उनका वैज्ञानिक कार्य आज भी आधुनिक खगोल विज्ञान की नींव माना जाता है।
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