बिहार का फैसला: दूसरे चरण की 122 सीटों पर दिग्गजों की साख दांव पर, 11 नवंबर को होगा निर्णायक मतदान
पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे और आखिरी चरण का चुनावी शोर थम गया है। अब राज्य की जनता 11 नवंबर को मतदान के माध्यम से यह तय करेगी कि बिहार की बागडोर किसके हाथों में जाएगी। इस चरण में कुल 122 विधानसभा सीटों पर 1302 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद होगी।
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यह चरण इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल के 16 मंत्री, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, और राजद नेता तेजस्वी प्रसाद यादव जैसे कई दिग्गज मैदान में हैं।
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पहले चरण में 6 नवंबर को हुई वोटिंग में 65 फीसदी से अधिक मतदान दर्ज किया गया था, जिसने दूसरे चरण के लिए राजनीतिक माहौल और भी गरमा दिया है। अब 20 जिलों की 122 सीटों पर होने वाली वोटिंग से यह तय होगा कि NDA और महागठबंधन में से कौन सी राजनीतिक ताकत जनता का विश्वास जीत पाएगी।
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राजनीतिक दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर
दूसरे चरण के चुनाव में मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। तेजस्वी यादव अपनी परंपरागत सीट राघोपुर से मैदान में हैं, जहां उनके सामने एनडीए की ओर से कड़ी चुनौती है।
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वहीं, भाजपा के दिग्गज और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा, जदयू मंत्री सुमित कुमार सिंह (चकई), भाजपा विधायक श्रेयसी सिंह (जमुई), जदयू मंत्री लेशी सिंह (धमदाहा) और भाजपा मंत्री नीरज कुमार सिंह (छातापुर) जैसी सीटें भी चर्चा में हैं।
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इन सीटों पर मुकाबला न सिर्फ उम्मीदवारों के बीच है, बल्कि यह राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने वाला संघर्ष भी माना जा रहा है।
14 नवंबर को जब मतगणना होगी, तब यह साफ हो जाएगा कि जनता ने किसे चुना है – विकास के एजेंडे को या बदलाव के वादे को।
इन जिलों में होगा मतदान
दूसरे चरण का मतदान पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, बांका, जमुई, गया, औरंगाबाद, जहानाबाद, अरवल, कैमूर, नवादा और रोहतास जिलों की सीटों पर होगा।
इन इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए हैं और चुनाव आयोग की निगरानी में सभी मतदान केंद्रों पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
अब सबकी निगाहें 11 नवंबर पर टिकी हैं, जब बिहार की जनता यह तय करेगी कि अगले पांच साल के लिए राज्य का नेतृत्व किसे सौंपना है।राजनीतिक दलों के लिए यह चरण “साख बचाने और सत्ता पाने” की जंग साबित होने जा रहा है।
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