विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नीति आयोग का बड़ा सुझाव, टैक्स सुधार से बढ़ेगा भरोसा

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारत सरकार ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने और टैक्स व्यवस्था को सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नीति आयोग ने शुक्रवार को सुझाव दिया कि विदेशी कंपनियों के लिए अनुमानित कराधान योजना (Presumptive Taxation Scheme) लागू की जानी चाहिए। इससे निवेशकों को टैक्स विवादों से राहत मिलेगी और भारत में निवेश का माहौल और पारदर्शी होगा।

निवेशकों को मिलेगा स्थिरता का भरोसा

नीति आयोग के कार्यपत्र में कहा गया है कि यह वैकल्पिक स्कीम विदेशी कंपनियों को स्पष्ट और स्थिर टैक्स व्यवस्था का भरोसा देगी। इसमें स्थायी प्रतिष्ठान (Permanent Establishment – PE) से जुड़े विवादों को सरल बनाया जाएगा और अनुपालन प्रक्रिया आसान होगी।

यह कदम न केवल निवेशकों का विश्वास बढ़ाएगा बल्कि भारत के कराधान अधिकार और सरकारी राजस्व की सुरक्षा भी करेगा।

क्यों जरूरी है यह सुधार?

भारत में पिछले कुछ वर्षों से विदेशी निवेश (FDI) लगातार बढ़ रहा है, लेकिन जटिल नियम और टैक्स विवाद कई बार निवेशकों को हतोत्साहित करते हैं।

खासकर PE रेगुलेशन की अस्पष्टता के कारण कई कंपनियां असमंजस में रहती हैं।

आयोग का कहना है कि अनुमानित कराधान लागू होने के बाद भारत की टैक्स व्यवस्था एक “माइनफील्ड” से बदलकर “रोशनी से भरे रास्ते” में बदल जाएगी।

इससे भारत की ग्लोबल बिजनेस इंडेक्स रैंकिंग में भी सुधार होगा।

कैसे काम करेगी योजना?

विदेशी कंपनियां तय दर पर अपनी आय घोषित कर सकेंगी।

अलग से बहीखाते और ऑडिट की झंझट से छुटकारा मिलेगा।

यदि किसी कंपनी का वास्तविक लाभ तय दर से कम है तो वह नियमित रिटर्न दाखिल करने का विकल्प चुन सकेगी।

अलग-अलग सेक्टर के लिए अलग-अलग लाभ दर तय की जा सकती है।

मुकदमों से राहत और डिजिटल सेक्टर पर फोकस

नीति आयोग ने सिफारिश की है कि टैक्स अधिकारियों को विशेष ट्रेनिंग दी जाए ताकि वे डिजिटल और सीमा-पार मामलों में नियमों को एक समान लागू करें। इस स्कीम के तहत आने वाली कंपनियों पर PE विवाद से जुड़े मुकदमे नहीं चलेंगे, जिससे उन्हें सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल मिलेगा।

नीति आयोग का विजन

नीति आयोग के सीईओ बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम ने कहा:

“भारत का लक्ष्य 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का है। इसके लिए स्थिर और पूर्वानुमान योग्य टैक्स व्यवस्था जरूरी है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में चल रहे आर्थिक सुधारों के तहत यह योजना विदेशी निवेश आकर्षित करने की दिशा में बड़ा कदम होगी।”

Karan Pandey

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