मध्यप्रदेश में समुचित शिक्षा की आवश्यकता — अमित गौतम

सीधी/मध्यप्रदेश(राष्ट्र की परम्परा)
सीधी जिले के युवा पत्रकार अमित गौतम ने बताया कि शिक्षा किसी भी समाज में परिवर्तन लाने के साथ–साथ उस देश और प्रदेश के विकास को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण उपकरण है, क्योंकि किसी भी समाज में परिवर्तन लाने के लिए सर्वप्रथम शिक्षा में परिवर्तन लाना आवश्यक होता है। शिक्षा लोगों के विचारों को परिवर्तित करती है तथा नई सोच उनपन्न कर मनुष्य को सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक उन्नति की ओर बढ़ाती है।
जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए शिक्षा सबसे प्रभावी कारक है। शिक्षा स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाती है, शिक्षा से परिवार नियोजन के उपायों के प्रति जागरूकता बढ़ती है जिससे जनसंख्या वृद्धि के नियंत्रण में लोगों को सहायता मिलती है, अनेक कारणों से भी जनसंख्या वृद्धि को बल मिलता है। भारत में विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य उपलब्ध ना होने के कारण ही जनसंख्या वृद्धि दर अधिक है जिन राज्यों में साक्षरता अधिक हैं, वहां जनसंख्या वृद्धि दर कम है और जिन समाजों में साक्षरता कम है वहां जनसंख्या वृद्धि अधिक है, जैसे कि मुस्लिम और दलित समाज।
अमित गौतम ने बताया कि प्रत्येक देश के जनसंख्या संक्रमण काल के एक समय ऐसा था जब युवा और कार्यशील जनसंख्या अधिक होती थी। इस जनसंख्या में ऊर्जा अधिक होती थी और वही कार्यशील जनसंख्या होती थी, इस जनसंख्या की ऊर्जा देशहित के लिए विशेष महत्वपूर्ण है और यह स्वस्थ शिक्षित और कुशल होती है और वही जनसंख्या देश पर भारी हो जाती है और अशिक्षित होने पर देश में बेरोजगारी बढ़ती है, अशिक्षा के कारण नैतिकता का विकास भी नहीं हो पाता है जिसके कारण यही जनसंख्या ऐसी क्रियाओं में संलग्न हो जाती है जो देशहित और विकास के लिए बाधक बन जाती है। भारत इस समय इसी दौर से गुजर रहा है अतः देश को आवश्यकता यह है कि सामाजिक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सार्वजनिक औपचारिक रूप से प्रौढ़ शिक्षा सर्वसुलभ कराई जाए, यह शिक्षा सामान्य और व्यावसायिक दोनों होनी चाहिए अन्यथा देश में बढ़ रही बेरोजगारी देश के विकास में महत्वपूर्ण रूप से बाधक होगी।
अमित गौतम ने बताया कि यही कारण है कि आरक्षण के ट्रिकल डाउन के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए विशेष महत्वपूर्ण है, क्योंकि नौकरियां न्यूनतम योग्यता के स्तर के कारण ही नही मिल पाती है। गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक शिक्षा सर्वसुलभ न होने के कारण नैतिकता और विकास में वृद्धि होती है यही कारण है कि गरीब और पिछड़े वर्ग के बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त हो पाती है जिसके कारण बच्चे किसी भी नौकरी विशेष के लिए निर्धारित न्यूनतम योग्यता के (अंक) भी प्राप्त नहीं हो पाता है, यही कारण है कि भारत में गुणवत्तापूर्ण सार्वजिक शिक्षा सर्वसुलभ न होने के कारण ही आरक्षण का समुचित रूप से ट्रिकल डाउन नही हो पा रही है। कृषि ग्रामीण क्षेत्रों का प्रमुख व्यवसाय है ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण सामान्य और व्यावसायिक शिक्षा उपलब्ध होगी तभी प्राथमिक से द्वितीयक और तृतीयक व्यवसायों की ओर जनसंख्या का स्थानांतरण होता है क्योंकि कृषि पर निर्भर अतिरिक्त जनसंख्या को इन व्यवसायों में रोजगार मिलने लगता है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध होने के कारण जनसंख्या वृद्धि दर कम हो जाती है जिससे पुनः कृषि पर जनसंख्या वृद्धि का दबाव कम हो जाता हैं।

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