फोकस वर्ड – संगोष्ठीटैग – गोरखपुर, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश राज्य अभिलेखागार, राष्ट्रीय संगोष्ठी, स्वतंत्रता आंदोलन, जेएनयू, शैक्षणिक भ्रमण
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग तथा उत्तर प्रदेश राज्य अभिलेखागार के संयुक्त तत्वावधान में 19 एवं 20 फरवरी को श्री महायोगी गुरु गोरक्षनाथ शोधपीठ में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय “भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की गूँज: इतिहास लेखन (उत्तर प्रदेश, आंदोलन की केंद्रभूमि के संदर्भ में)” रहा, जिसमें देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से आए शोधार्थियों एवं प्राध्यापकों ने सक्रिय सहभागिता की।
संगोष्ठी में उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक भूमिका, विशेषकर स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी केंद्रीयता तथा इतिहास लेखन की बदलती प्रवृत्तियों पर गंभीर विमर्श हुआ। वक्ताओं ने अभिलेखीय स्रोतों, प्रतिबंधित साहित्य, जनआंदोलनों और क्षेत्रीय योगदानों के नए आयामों पर प्रकाश डाला और स्वतंत्रता संग्राम के पुनर्पाठ की आवश्यकता पर बल दिया।
संगोष्ठी के उपरांत शनिवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली के शोधार्थियों ने विश्वविद्यालय परिसर का शैक्षणिक भ्रमण किया। कार्यक्रम की शुरुआत आधुनिक इतिहास विभाग में आयोजित संवाद सत्र से हुई, जिसमें दोनों विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों ने संगोष्ठी की प्रासंगिकता, प्रमुख निष्कर्षों और भविष्य की शोध संभावनाओं पर विचार साझा किए।
जेएनयू के एशियन स्टडी विभाग के आचार्य प्रो. हृदयनारायण के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने इतिहास विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. मनोज कुमार तिवारी सहित विभाग के शिक्षकों और शोधार्थियों के प्रति आतिथ्य एवं सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। जेएनयू की शोधार्थी जश्नप्रीत रंधावा तथा प्रियंका यादव ने इस शैक्षणिक प्रवास को ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और आपसी अकादमिक संबंधों को सुदृढ़ करने वाला अनुभव बताया।
भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने विश्वविद्यालय पुस्तकालय, चौरी-चौरा शहीद स्मारक, कला संकाय, प्राचीन इतिहास विभाग के संग्रहालय के साथ-साथ रेल संग्रहालय गोरखपुर एवं विन्ध्यवासिनी पार्क का अवलोकन किया।
तीन दिवसीय इस शैक्षणिक प्रवास को प्रतिभागियों ने अकादमिक संवाद और ऐतिहासिक समझ के विस्तार की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण एवं स्मरणीय बताया।
संगोष्ठी में उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक भूमिका, विशेषकर स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी केंद्रीयता तथा इतिहास लेखन की बदलती प्रवृत्तियों पर गंभीर विमर्श हुआ। वक्ताओं ने अभिलेखीय स्रोतों, प्रतिबंधित साहित्य, जनआंदोलनों और क्षेत्रीय योगदानों के नए आयामों पर प्रकाश डाला और स्वतंत्रता संग्राम के पुनर्पाठ की आवश्यकता पर बल दिया।
संगोष्ठी के उपरांत शनिवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली के शोधार्थियों ने विश्वविद्यालय परिसर का शैक्षणिक भ्रमण किया। कार्यक्रम की शुरुआत आधुनिक इतिहास विभाग में आयोजित संवाद सत्र से हुई, जिसमें दोनों विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों ने संगोष्ठी की प्रासंगिकता, प्रमुख निष्कर्षों और भविष्य की शोध संभावनाओं पर विचार साझा किए।
जेएनयू के एशियन स्टडी विभाग के आचार्य प्रो. हृदयनारायण के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने इतिहास विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. मनोज कुमार तिवारी सहित विभाग के शिक्षकों और शोधार्थियों के प्रति आतिथ्य एवं सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। जेएनयू की शोधार्थी जश्नप्रीत रंधावा तथा प्रियंका यादव ने इस शैक्षणिक प्रवास को ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और आपसी अकादमिक संबंधों को सुदृढ़ करने वाला अनुभव बताया।
भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने विश्वविद्यालय पुस्तकालय, चौरी-चौरा शहीद स्मारक, कला संकाय, प्राचीन इतिहास विभाग के संग्रहालय के साथ-साथ रेल संग्रहालय गोरखपुर एवं विन्ध्यवासिनी पार्क का अवलोकन किया।
तीन दिवसीय इस शैक्षणिक प्रवास को प्रतिभागियों ने अकादमिक संवाद और ऐतिहासिक समझ के विस्तार की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण एवं स्मरणीय बताया।

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