मां प्यार बिना है सूना
सारा यह संसार..!
मां के आंचल में है सिमटा
स्नेह-प्यार-मनुहार..!!
दुनियां में सब कुछ मिलता है
जो भी लिखा है किस्मत में, मां का प्यार खरीद न सकता
कोई किसी भी कीमत में।
मां के ममता से है खाली
दौलत का बाजार..!!
मां के स्नेह बिना है सूना…..
कम या ज्यादा हर चीज का
कोई न कोई मोल है,
एक मात्र मां की ममता ही
बनी हुई अनमोल है ।
बिन मांगे जो लुटाती रहती
प्यार को बारम्बार.!!
मां के स्नेह बिना है सूना….
मां के प्यार की परिभाषा
लिखी न किसी किताब में,
मां को पाने की खुशी
मिले न किसी खिताब में।
मां के प्यार बिना है जग में
धन – दौलत बेकार..!!
मां के स्नेह बिना है सूना….
लाख दुःख सहके भी हरदम
स्नेह-प्यार लुटाती मां,
खुशी मिले चाहे भी जिससे
हर छोटी बात बताती मां।
‘श्रीश’ पे प्यार लुटाने खातिर
हरदम रहती मां तैयार..!!
मां के स्नेह बिना है सूना..
सारा यह संसार..!!
डॉ.उमेश कुमार पटेल ‘श्रीश’
महराजगंज
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