किसी का पद उसकी श्रेष्ठता
निश्चित नहीं कर सकता है,
पर उसका आचार व्यवहार ही
उसकी श्रेष्ठता तय करता है।
प्रशंसा सभी को प्रिय होती है,
पर कोई नहीं समझ पाता है,
कि यह महान विष के समान है,
यह सारे अहंकार की जननी है।
प्रशंसा उर्वरक का काम करती है,
इससे हमारी कुराह शुरू होती है,
प्रशंसा बिन कोई प्रसन्न नहीं होता
झूठ के बिना प्रशंसा नहीं होती है।
जीवन में किसी के आने का एक
उद्देश्य होता है, कुछ आजमाते हैं,
कुछ सिखाते हैं, उपयोग करते हैं,
तो कुछ जीवन का अर्थ बताते हैं।
आदित्य झूठ फ़रेब का जमाना है,
झूठ बोलकर शर्मिंदा नहीं होते हैं,
सच को भी झूठ साबित कर देते हैं,
अब अर्थ का अनर्थ निकाल लेते हैं।
•कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) बिहार में भ्रष्ट अधिकारियों पर निगरानी ब्यूरो लगातार शिकंजा कस…
सांकेतिक फोटो जम्मू-कश्मीर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) के रामबन जिले की राजगढ़ तहसील में शनिवार…
सलेमपुर/देवरिया ( राष्ट्र की परम्परा)।सलेमपुर कोतवाली क्षेत्र के टीचर्स कॉलोनी में गुरुवार दोपहर एक 19…
पुलिस पर लापरवाही का आरोप, आरोपियों की गिरफ्तारी व बुलडोजर कार्रवाई की मांग महराजगंज(राष्ट्र की…
बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। बीते वर्ष जिस इलाके में खूंखार भेड़िये का आतंक था उसी…
बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का संदीप सिंह बिसेन…