किसी का पद उसकी श्रेष्ठता
निश्चित नहीं कर सकता है,
पर उसका आचार व्यवहार ही
उसकी श्रेष्ठता तय करता है।

प्रशंसा सभी को प्रिय होती है,
पर कोई नहीं समझ पाता है,
कि यह महान विष के समान है,
यह सारे अहंकार की जननी है।

प्रशंसा उर्वरक का काम करती है,
इससे हमारी कुराह शुरू होती है,
प्रशंसा बिन कोई प्रसन्न नहीं होता
झूठ के बिना प्रशंसा नहीं होती है।

जीवन में किसी के आने का एक
उद्देश्य होता है, कुछ आजमाते हैं,
कुछ सिखाते हैं, उपयोग करते हैं,
तो कुछ जीवन का अर्थ बताते हैं।

आदित्य झूठ फ़रेब का जमाना है,
झूठ बोलकर शर्मिंदा नहीं होते हैं,
सच को भी झूठ साबित कर देते हैं,
अब अर्थ का अनर्थ निकाल लेते हैं।

•कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’

rkpnews@desk

Recent Posts

रजत जयंती समारोह में शिक्षा और संगीत का अद्भुत संगम, छाया उत्सव का रंग

स्टेबिन बेन की सुरमयी शाम ने बांधा समां, ब्लूमिंग बड्स स्कूल की रजत जयंती पर…

51 minutes ago

किलाबंदी अभियान में 424 यात्री बिना टिकट पकड़े गए

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। मऊ रेलवे स्टेशन पर गुरुवार को किलाबंदी टिकट चेकिंग अभियान चलाकर…

51 minutes ago

एनएच-730 पर तेज रफ्तार बनी मौत की वजह, ड्राइविंग सीख रहा युवक हादसे का शिकार

राष्ट्रीय राजमार्ग-730 पर भीषण सड़क हादसा: फॉर्च्यूनर–अल्टो की आमने-सामने टक्कर, युवक की मौत, दो गंभीर…

1 hour ago

सरोजिनी नायडू से वरुण भाटी तक: 13 फरवरी को जन्मे प्रेरणास्रोत

🔹 13 फरवरी को जन्मे प्रमुख महान व्यक्ति🔸 सरोजिनी नायडू (जन्म: 13 फरवरी 1879 –…

2 hours ago

आज के दिन हुए निधन: 13 फरवरी की ऐतिहासिक स्मृतियाँ

📌 13 फरवरी को हुए प्रमुख निधन: इतिहास में दर्ज महान व्यक्तित्वों को श्रद्धांजलि13 फरवरी…

2 hours ago

आज का इतिहास 13 फ़रवरी: युद्ध, विज्ञान और राजनीति की बड़ी कहानियाँ

📜 13 फ़रवरी की महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएँ 🗓️ आज का इतिहास: 13 फ़रवरी की प्रमुख…

2 hours ago