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मऊ: राजस्व वसूली में ढिलाई पर प्रशासन सख्त, बकायेदारों की संपत्ति कुर्क करने के निर्देश

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद प्रशासन ने वित्तीय अनुशासन और राजस्व संग्रहण को मजबूत करने के उद्देश्य से कर करेत्तर राजस्व वसूली और अन्य राजस्व कार्यों की व्यापक समीक्षा की। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित मासिक समीक्षा बैठक में प्रशासनिक कार्यप्रणाली की गहन जांच करते हुए कई विभागों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया। बैठक में राजस्व वसूली की प्रगति, सीएम डैशबोर्ड की स्थिति, लंबित वादों के निस्तारण और विभिन्न विभागों की कार्यशैली पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि वित्तीय वर्ष के भीतर निर्धारित राजस्व लक्ष्य को हर हाल में पूर्ण किया जाए। उन्होंने राजस्व वसूली की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को सुधारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

जनवरी माह की राजस्व वसूली की स्थिति का आंकलन

बैठक में जनवरी माह के दौरान विभागवार राजस्व वसूली की समीक्षा की गई, जिसमें विभिन्न विभागों का प्रदर्शन मिश्रित पाया गया। समीक्षा के दौरान व्यापार कर विभाग ने निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 53.26 प्रतिशत वसूली दर्ज की, जो अपेक्षाकृत कमजोर रही। वहीं स्टैंप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 114.09 प्रतिशत वसूली हासिल की।

परिवहन विभाग ने 72.50 प्रतिशत, आबकारी विभाग ने 74 प्रतिशत, वन विभाग ने 160.44 प्रतिशत तथा खनन विभाग ने 46.20 प्रतिशत वसूली दर्ज की। इसके अलावा भू-राजस्व विभाग की वसूली 25.80 प्रतिशत पाई गई। विद्युत देय की वसूली 99.49 प्रतिशत, बैंक देय 103.6 प्रतिशत, चिकित्सा एवं लोक स्वास्थ्य विभाग 101.33 प्रतिशत तथा स्थानीय निकायों की वसूली 102.66 प्रतिशत दर्ज की गई।

खनन और व्यापार कर विभागों की कमजोर प्रगति पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए विभागीय अधिकारियों को लक्ष्य प्राप्ति के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए।

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बड़े बकायेदारों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

मुख्य देय और विविध देयों की समीक्षा के दौरान सभी तहसीलों में वसूली मानक के अनुरूप पाई गई, लेकिन शीर्ष दस बकायेदारों के खिलाफ कार्रवाई में लापरवाही सामने आई। समीक्षा में पाया गया कि आठ बड़े बकायेदारों से पिछले माह कोई वसूली नहीं हो सकी।

इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित तहसीलदारों को निर्देश दिए कि बकायेदारों की संपत्तियों की कुर्की और नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर वसूली सुनिश्चित की जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में अमीनवार औसत वसूली भी काफी कम पाई गई, जिस पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।

फैमिली कोर्ट आरसी वसूली में लापरवाही पर चेतावनी

बैठक में फैमिली कोर्ट से जारी आरसी वसूली की स्थिति भी समीक्षा के दायरे में रही। जिलाधिकारी ने पाया कि कई मामलों में अमीनों द्वारा वसूली में लापरवाही बरती जा रही है। इस पर उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिए कि जिन अमीनों की वसूली शून्य है, उन्हें तत्काल चिन्हित कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि फैमिली कोर्ट के आदेश प्रायः घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं के हित में जारी होते हैं। ऐसे मामलों में वसूली कर पीड़ित महिलाओं को संपत्ति उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

सीएम डैशबोर्ड पर विभागीय ग्रेडिंग का विश्लेषण

सीएम डैशबोर्ड के आधार पर विभिन्न विभागों के प्रदर्शन की भी समीक्षा की गई। एमओयू मॉनिटरिंग में बी ग्रेड, आबकारी विभाग के राजस्व लक्ष्य में सी ग्रेड तथा मंडी आवक में बी ग्रेड दर्ज किया गया। गन्ना मूल्य भुगतान में डी ग्रेड मिलने पर जिलाधिकारी ने विशेष चिंता व्यक्त की।

उन्होंने स्पष्ट किया कि गन्ना किसानों को समय से भुगतान सुनिश्चित करना शासन की प्राथमिकता है। धन की कमी के कारण भुगतान में हो रही देरी को दूर करने के लिए शासन से पत्राचार कर धन आवंटन कराने और किसानों को शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

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राजस्व संहिता के लंबित वादों पर नाराजगी

बैठक में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की विभिन्न धाराओं में लंबित वादों की स्थिति भी सामने आई। कुर्रा बटवारा (धारा 116) में सी ग्रेड, धारा 98 में बी ग्रेड, नामांतरण (धारा 34) में डी ग्रेड तथा पैमाइश (धारा 24) में बी ग्रेड दर्ज की गई।

जिलाधिकारी ने लंबित वादों के निस्तारण में देरी पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए सभी संबंधित पीठासीन अधिकारियों को समय सीमा के बाद लंबित मामलों का तत्काल निस्तारण करने के निर्देश दिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्य में सुधार नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

धारा 98 के अंतर्गत सभी उप जिलाधिकारियों को दो दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत कर मामलों का निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

नामांतरण मामलों में सुधार की आवश्यकता

नामांतरण (धारा 34) में डी ग्रेड मिलने को प्रशासनिक कार्यप्रणाली के लिए गंभीर माना गया। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि समय सीमा से अधिक लंबित नामांतरण मामलों का तत्काल समाधान किया जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नामांतरण प्रक्रिया में देरी से आम जनता को परेशानी होती है और प्रशासन की छवि प्रभावित होती है।

आईजीआरएस शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर जोर

बैठक में आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा में डी ग्रेड मिलने पर भी नाराजगी जताई गई। जिलाधिकारी ने कहा कि असंतोषजनक फीडबैक मिलने से जनपद की रैंकिंग प्रभावित हो रही है।
उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि शिकायतों का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण तरीके से किया जाए। साथ ही शिकायतकर्ता से सीधे संवाद स्थापित कर फीडबैक लिया जाए और आवश्यक होने पर स्थलीय निरीक्षण भी किया जाए।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि असंतोषजनक फीडबैक वाली शिकायतों का स्वयं अध्ययन करने के बाद ही पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज की जाए।

प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने पर जोर

बैठक में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि राजस्व वसूली और वादों के निस्तारण में सुधार के लिए सभी अधिकारियों को सामूहिक रूप से कार्य करना होगा।
बैठक में अपर जिलाधिकारी, सिटी मजिस्ट्रेट, सभी उप जिलाधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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Karan Pandey

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