मकर संक्रांति: सूर्य की गति, संस्कृति की चेतना

नवनीत मिश्र

    भारतीय सभ्यता प्रकृति, खगोल और जीवन के आपसी संतुलन पर आधारित रही है। इसी संतुलन की सजीव अभिव्यक्ति है मकर संक्रांति। एक ऐसा महापर्व जो सूर्य की खगोलीय गति के साथ-साथ भारतीय संस्कृति की चेतना, कृषि जीवन की लय और सामाजिक समरसता को एक सूत्र में बाँधता है। यह पर्व केवल तिथि या परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाला सांस्कृतिक संदेश है।

सूर्य की गति और उत्तरायण का वैज्ञानिक आधार

मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है और उत्तरायण की यात्रा आरंभ करता है। इस खगोलीय परिवर्तन का भारतीय जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है। उत्तरायण को प्रकाश, ऊर्जा और सृजन का काल माना गया है। वैदिक काल से सूर्य को जीवनदाता, स्वास्थ्य और चेतना का प्रतीक स्वीकार किया गया है। यही कारण है कि इस दिन सूर्योपासना, स्नान और दान को विशेष महत्व दिया गया है।

संस्कृति की चेतना और परंपराओं की विविधता

मकर संक्रांति भारत की सांस्कृतिक विविधता का उत्सव है। देश के अलग-अलग हिस्सों में यह पर्व भिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कहीं यह खिचड़ी के रूप में, कहीं पोंगल के रूप में, कहीं माघ बिहू तो कहीं उत्तरायण के रूप में उल्लास और उमंग का कारण बनती है। नाम भले अलग हों, लेकिन मूल भावना एक ही है- नव आरंभ, समृद्धि और सामाजिक मेलजोल।
इस पर्व पर तिल और गुड़ का विशेष स्थान है। तिल शरीर को ऊष्मा देता है और गुड़ मिठास। दोनों मिलकर जीवन में स्वास्थ्य और मधुर संबंधों का प्रतीक बन जाते हैं। लोक परंपराओं में यह संदेश स्पष्ट है कि कटुता छोड़कर मधुरता अपनाई जाए।

कृषि से गहरा संबंध

मकर संक्रांति भारतीय कृषि परंपरा से गहराई से जुड़ा पर्व है। यह समय किसानों के लिए परिश्रम के फल को देखने और नई उम्मीदों के साथ आगे बढ़ने का होता है। खेतों में लहलहाती फसलें और अन्न की उपलब्धता इस पर्व को उत्सव का स्वरूप देती हैं। प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने की भावना भारतीय सभ्यता की मूल आत्मा रही है, जो इस पर्व में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

दान, सेवा और सामाजिक समरसता

इस दिन गंगा स्नान, दान और सेवा की परंपरा केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति सिखाती है कि समृद्धि का वास्तविक अर्थ बाँटना है। अन्न, वस्त्र और ज्ञान का दान समाज में संतुलन और करुणा को बनाए रखने का माध्यम बनता है।

पतंग, उल्लास और जीवन दर्शन

मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा भी गहरे प्रतीकात्मक अर्थ रखती है। खुला आकाश, ऊँचाइयों की ओर उड़ती पतंग और सामूहिक आनंद। यह सब मानव की आकांक्षाओं, स्वतंत्रता और उत्साह का प्रतीक है। यह पर्व प्रतिस्पर्धा को भी उल्लास और सौहार्द में बदलने का संदेश देता है।

आधुनिक संदर्भ में मकर संक्रांति

आज के भौतिक और तकनीक-प्रधान युग में मकर संक्रांति हमें प्रकृति की लय को समझने और जीवन में संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देती है। सूर्य की नियमित गति, ऋतुओं का अनुशासन और सामूहिक सहभागिता—ये सभी मूल्य आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि प्रगति तभी सार्थक है, जब वह प्रकृति और समाज के साथ सामंजस्य में हो।

       मकर संक्रांति वास्तव में सूर्य की गति और संस्कृति की चेतना का महापर्व है। यह प्रकाश की ओर बढ़ते जीवन का प्रतीक है, जहाँ अंधकार से बाहर निकलकर ऊर्जा, सद्भाव और कर्मशीलता का मार्ग प्रशस्त होता है। भारतीय सभ्यता का यही संदेश इस पर्व के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता चला आ रहा है। प्रकृति के साथ, समाज के लिए और जीवन के उत्सव के रूप में।
rkpNavneet Mishra

Recent Posts

भाटपार रानी से कनाडा तक: उज्जवल दीक्षित की ग्लोबल उड़ान

देवरिया के लाल उज्जवल दीक्षित ने रचा इतिहास: कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ सस्केचवान में टॉप-5,…

3 hours ago

ट्रंप बोले—जरूरत पड़ी तो करूंगा दखल, पाकिस्तान नेतृत्व की सराहना

वाशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा)। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच…

6 hours ago

La Paz के पास भीषण विमान हादसा, 15 की मौत

ला पाज (राष्ट्र की परम्परा)। Bolivia की राजधानी La Paz के पास शुक्रवार को एक…

6 hours ago

महराजगंज में रमजान का संदेश: रहमत, मगफिरत और निजात की राह

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। माह-ए-रमजान इबादत, सब्र और आत्मशुद्धि का पवित्र महीना माना जाता है।…

6 hours ago

महराजगंज के दरौली में भक्ति का सागर: श्रीमद्भागवत कथा में उमड़ा जनसैलाब

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। दरौली ग्राम सभा इन दिनों आध्यात्मिक रंग में रंगी नजर आ…

6 hours ago

तनाव भरे दौर में अध्यात्म का अमृत: भीतर की शांति ही सच्ची सफलता

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। तेजी से बदलते आधुनिक दौर में सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन मानसिक…

8 hours ago