भारतीय भाषा उत्सव के अंतर्गत मनायी गई महाकवि सुब्रमण्यम भारती की जयंती

संगम साहित्य देश की साझी सांस्कृतिक विरासत:डीएम

सभी भारतीय भाषाओं में है ज्ञान का अकूत भंडार: डीएम

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)

कश्मीर से कन्याकुमारी तक बोली जाने वाली सारी भाषाएं हमारी है। हम उनके हैं, वे हमारे हैं। आधुनिक तमिल भाषा के महाकवि सुब्रमण्यम भारती ने पारंपरिक तमिल सांस्कृतिक आख्यानों में आधुनिक प्रगतिशील एवं सुधारवादी विचारधारा का समावेश किया, जिससे राष्ट्रवाद की धारा को मजबूती मिली और देश स्वतंत्रता के पथ पर तीव्र गति से अग्रसर हुआ।

उक्त बातें जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने नागरी प्रचारिणी सभा के तुलसी सभागार में भारतीय भाषा उत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत महाकवि सुब्रमण्यम भारती की जयंती के अवसर पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए कही।जिलाधिकारी ने कहा कि ‘पंचाली शपथम’ और ‘कन्नन पत्तु’ जैसी प्रतीकात्मक रचना के माध्यम से उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। इन रचनाओं का हिंदी सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया गया।
जिलाधिकारी ने पत्रकारिता के क्षेत्र में सुब्रमण्यम भारती के योगदानों की भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि ‘इंडिया’ तथा ‘विजया’ नामक जर्नल में प्रकाशित लेखों से उन्होंने ब्रिटिश राज के वास्तविक चरित्र से जनता को रूबरू कराया। सुब्रमण्यम भारती ने अपने व्यक्तित्व से उत्तर और दक्षिण को जोड़ने का कार्य किया।
जिलाधिकारी ने कहा कि भारत विविधताओं का देश है। सभी भारतीय भाषाओं में ज्ञान का अकूत भंडार छिपा है। तमिल भाषा का संगम साहित्य पूरे देश की साझी विरासत है। हर भारतीय को उसे पढ़ना चाहिए, जिससे उसे देश की विशालता और सांस्कृतिक धरोहरों की जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने एक भारत श्रेष्ठ भारत की संकल्पना के साथ वाराणसी में ‘काशी तमिल संगमम’ का शुभारंभ किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य उत्तर और दक्षिण भारत के ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों के कई पहलुओं, ज्ञान और सांस्कृतिक परंपराओं को करीब लाना है और हमारी साझी विरासत के समझ पैदा करना है। इससे राष्ट्रीय एकता को मजबूती मिलेगी।
नागरी प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष परमेश्वर जोशी ने भी महाकवि सुब्रमण्यम भारती के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि सुब्रमण्यम भारती को उनके योगदान की वजह से महाकवि भारतियार की उपाधि दी गई। उन्हें तमिल के साथ-साथ संस्कृत, हिंदी, बंगाली और अंग्रेजी का अच्छा ज्ञान था। वे उत्तर व दक्षिण भारत के मध्य मजबूत सेतु की भाँति थे।
इससे पूर्व कार्यक्रम का औपचारिक प्रारंभ सुब्रमण्यम भारती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। विनीता पांडेय ने भोजपुरी में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। विष्णुकांत त्रिपाठी तथा खुशी मणि त्रिपाठी सहित विभिन्न छात्रों ने सुब्रमण्यम भारती के जीवनी पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर जीआईसी के प्रधानाचार्य प्रदीप शर्मा, उप प्रधानाचार्य महेंद्र प्रसाद, नागरी प्रचारिणी सभा के महामंत्री डॉ अनिल कुमार त्रिपाठी, अवधेश त्रिपाठी, अभय द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में स्कूली छात्र व गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।


rkpnews@somnath

Recent Posts

स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों को मिली बड़ी राहत, कुलपति प्रो. पूनम टंडन के निर्णय का स्वागत

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन से विश्वविद्यालय…

9 hours ago

फर्जी फर्मों के जरिए 18 करोड़ की जीएसटी चोरी, पुलिस की बड़ी कार्रवाई

संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। पुलिस ने जीएसटी कर चोरी और फर्जी बिलिंग के बड़े नेटवर्क…

9 hours ago

विजय कुशवाहा बने प्रदेश संगठन मंत्री, कांग्रेस के श्रम प्रकोष्ठ में मिली बड़ी जिम्मेदारी

सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। कांग्रेस पार्टी ने संगठन को मजबूत करने तथा श्रमिकों और मजदूरों…

9 hours ago

सिकंदरपुर में 4 जून को चलेगा अतिक्रमण हटाओ और प्रतिबंधित पॉलिथीन जब्ती अभियान

सिकंदरपुर/बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। आदर्श नगर पंचायत सिकंदरपुर द्वारा नगर क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त बनाने…

13 hours ago

संत कबीर नगर के बेलौली से दिल्ली तक: नागेंद्र नाथ त्रिपाठी का प्रेरक सफर

भाजपा संगठन के भरोसेमंद रणनीतिकार बने नागेंद्र नाथ त्रिपाठी, जिले में हर्ष ✍️ नवनीत मिश्र…

13 hours ago

मऊ में विश्व ब्राह्मण दिवस पर भव्य आयोजन, 1100 हनुमान चालीसा पाठ और फरसा पूजन संपन्न

कोपागंज/मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। आचार्य चाणक्य जयंती के अवसर पर विश्व ब्राह्मण दिवस का आयोजन…

13 hours ago