गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
उसका बाजार कस्बा के अम्बेडकर नगर के मोगलहा में स्थित हनुमानगढ़ी मन्दिर पर रविवार को भगवान वामन का प्राकट्य उत्सव धूमधाम से मनाया गया।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने भजन कीर्तन के साथ भगवान वामन के अवतार की कथा भी सुनी।
मन्दिर के पुजारी पं राधेश्याम द्विवेदी ने सुबह से ही तैयारी शुरू कर दी थी। वामन भगवान के प्राकट्य का उत्सव मनाने के लिए लोग मन्दिर में धीरे धीरे जुटने लगे, दोपहर 12 बजे भगवान वामन के चित्र की आरती उतारकर, विधिवत पूजा कर उत्सव मनाया गया। सभी ने आरती व प्रसाद भी ग्रहण किया। पूरा उत्सव का माहौल रहा। इसके पूर्व मंदिर के पुजारी राधेश्याम द्विवेदी ने सभी को वामन भगवान के अवतार की कथा विस्तार से सुनाते हुए कहा कि, एक बार दैत्यराज बलि ने इंद्र को परास्त कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया, इसके बाद उनकी मां अदिति बहुत दुखी हुईं उन्होंने अपने पुत्र के उद्धार के लिए विष्णु की आराधना की।
इससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट होकर बोले- देवी चिंता मत करो, मैं तुम्हारे पुत्र के रूप में जन्म लेकर इंद्र को उसका खोया राज्य दिलाऊंगा। समय आने पर उन्होंने अदिति के गर्भ से वामन के रूप में अवतार लिया।
एक दिन उन्हें पता चला कि राजा बलि स्वर्ग पर स्थायी अधिकार जमाने के लिए अश्वमेध यज्ञ करा रहा है यह जानकर वामन वहां पहुंचे, उनके तेज से यज्ञशाला प्रकाशित हो उठी। बलि ने उन्हें एक उत्तम आसन पर बिठाकर उनका सत्कार किया और अंत में उनसे भेंट मांगने के लिए कहा।
इस पर वामन चुप रहे। लेकिन जब बलि उनके पीछे पड़ गया तो उन्होंने अपने कदमों के बराबर तीन पग भूमि भेंट में मांगी। बलि ने उनसे और अधिक मांगने का आग्रह किया, लेकिन वामन अपनी बात पर अड़े रहे। इस पर बलि ने हाथ में जल लेकर तीन पग भूमि देने का संकल्प ले लिया। संकल्प पूरा होते ही वामन का आकार बढ़ने लगा और वे वामन से विराट हो गए।
उन्होंने एक पग से पृथ्वी और दूसरे से स्वर्ग को नाप लिया। तीसरे पग के लिए बलि ने अपना मस्तक आगे कर दिया, वह बोला- प्रभु, सम्पत्ति का स्वामी सम्पत्ति से बड़ा होता है। तीसरा पग मेरे मस्तक पर रख दें। वामन भगवान प्रसन्न होकर उसे पाताल का अधिपति बना दिया और देवताओं को उनके भय से मुक्ति दिलाई। कथा में गौतम मिश्र, वेदव्यास मिश्र,, मनोज जायसवाल, कपिलदेव, राजकुमार, गणेश आदि रहे।
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