भगवान वाल्मीकि ने संसार के लिए युगों-युगों तक की मानव संस्कृति की स्थापना -डॉ उमेश शर्मा

आगरा(राष्ट्र की परम्परा)
भारतीय संस्कृति के सत्य स्वरूप का गुणगान करने, जीवन का अर्थ समझाने, व्यवहार की शिक्षा से ओत – प्रोत ‘वाल्मीकि-रामायण’ एक महान् आदर्श ग्रंथ है। उसमें भारतीय संस्कृति का स्वरूप कूट-कूट कर भरा है। आदिकवि भगवान वाल्मीकि ने मर्यादा पुरषोत्तम श्रीराम चंद्र जी के समस्त जीवन-चरित को हाथ में रखे हुए आंवले की तरह प्रत्यक्ष देखा और उनके मुख से वेद ही रामायण के रूप में अवतरित हुए।
इस संदर्भ में डॉ उमेश शर्मा ने सभी देशवासियों को भगवान बाल्मीकि जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं व अनन्त बधाइयां देते हुए कहा कि, पारिवारिक मर्यादाओं के लिए सम्पूर्ण भारतीय साहित्य में वाल्मीकि रामायण से बढ़कर श्रेष्ठ ग्रंथ पृथ्वी पर कोई नहीं है। उन्होंने सारे संसार के लिए युगों-युगों तक की मानव संस्कृति की स्थापना की है। एक बार ध्यान में बैठे हुए वरुण-पुत्र के शरीर को दीमकों ने अपना घर बनाकर ढक लिया था। साधना पूरी करके जब यह दीमकों के घर, जिसे वाल्मीकि कहते हैं, से बाहर निकले तो लोग इन्हें वाल्मीकि कहने लगे। वाल्मीकि रामायण में स्वयं भगवान वाल्मीकि जी कहते हैं कि वे प्रचेता के पुत्र हैं। मनुस्मृति में प्रचेता को वशिष्ठ, नारद, पुलस्त्य आदि का भाई बताया गया है। बताया जाता है कि प्रचेता का एक नाम वरुण भी है और वरुण ब्रह्माजी के पुत्र थे। यह भी माना जाता है कि वाल्मीकि वरुण अर्थात् प्रचेता के 10वें पुत्र थे और उन दिनों के प्रचलन के अनुसार उनके भी दो नाम ‘अग्निशर्मा’ एवं ‘वाल्मीकि’ थे। प्रशिद्ध किंवदन्ती है कि बाल्यावस्था में ही भगवान वाल्मीकि जी को एक निःसंतान भीलनी ने चुरा लिया और प्रेमपूर्वक उनका पालन-पोषण किया। जिस वन प्रदेश में उस भीलनी का निवास था, वहाँ का भील समुदाय वन्य प्राणियों का आखेट एवं दस्युकर्म करता था। आदि कवी रामायण रचयिता महर्षि वाल्मीकि का जीवन बड़ा ही रोचक व प्रेरणादायक है। माना जता है कि वाल्मीकि जी महर्षि कश्यप और अदिति के नौंवे पुत्र प्रचेता की संतान हैं। उनकी माता का नाम चर्षणी और भाई का नाम भृगु था। इस बात से वाल्मीकि जी ने हृदय कर्म त्याग और जप तप का मार्ग अपना लिया। फिर कई वर्षों की कठिन तपस्या के फल स्वरूप उन्हे महर्षि पद प्राप्त हुआ। देश भर में महर्षि वाल्मीकि की जयंती को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर शोभायात्राओं का आयोजन भी होता है।भगवान महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित पावन ग्रंथ रामायण में प्रेम, त्याग, तप व यश की भावनाओं को महत्व दिया गया है। भगवान वाल्मीकि जी ने रामायण की रचना करके हर किसी को सद्‍मार्ग पर चलने की राह दिखाई। इस अवसर पर वाल्मीकि मंदिर में पूजा अर्चना भी की जाती है तथा शोभायात्रा के दौरान मार्ग में जगह-जगह के लोग इसमें बडे़ उत्साह के साथ भाग लेते हैं। झांकियों के आगे उत्साही युवक झूम-झूम कर महर्षि वाल्मीकि के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। महर्षि वाल्मीकि को याद करते हुए इस अवसर पर उनके जीवन पर आधारित झांकियां निकाली जाती हैं व राम भजन होता है। वेदों के अनुसार, व्रह्मा जी ने स्वयं महर्षि बाल्मीकि को आश्रम में प्रकट होकर उन्हें राम – सीता के जीवन में होने वाले घटनाओं को करुण रस में लिखने को कहा। इससे पूर्व अनेक रसों में यह घटना घट चुकी थी, आगे की घटना करुण रस प्रधान थी। जिसमें सीता-राम के विरह की वर्णन को जीवंत रूप देना था। आगे की सभी घटनाएं बिरह अवस्था में व्यतीत करनी थी, जिसमें करुण रस की प्रधानता थी। इस करुण रस में भी उन्होंने मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया। सीताराम ने कभी भी अपने मर्यादा का अतिक्रमण नहीं किया कितनी ही परिस्थितियां उनके विपरीत रही। भगवान वाल्मीकि ने सारे संसार के लिए युगों-युगों तक की मानव संस्कृति की स्थापना की हैं।

rkpnews@desk

Recent Posts

मेक्सिको में हिंसा के बीच भारतीय दूतावास की एडवाइजरी

मेक्सिको में जारी हिंसक झड़पों के बीच भारतीय दूतावास, मेक्सिको सिटी ने वहां रह रहे…

43 minutes ago

लाखों की सड़क 15 दिन में धराशायी: महराजगंज में पैचिंग ध्वस्त, PWD कटघरे में

महराजगंज में 15 दिन में उखड़ी सड़क: डोमा-कलनही मार्ग की पैचिंग ध्वस्त महराजगंज (राष्ट्र की…

51 minutes ago

सुबह-सुबह सख्त हुई देवरिया पुलिस, 3 घंटे में 18 स्थानों पर सघन जांच

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा) जनपद में कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा नागरिकों…

1 hour ago

बिहार भागने की फिराक में था आरोपी, पुलिस मुठभेड़ में घायल होकर गिरफ्तार

पुलिस मुठभेड़ में 25 हजार का इनामिया गो तस्कर गिरफ्तार, पैर में गोली लगने के…

2 hours ago

यूपी की 6 जल विद्युत परियोजनाएं 42 साल के लिए लीज पर

उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश की छह लघु जल विद्युत परियोजनाएं को 42 वर्षों के…

3 hours ago

नेपाल बस हादसा: धादिंग में 18 मौतें, 25 घायल

काठमांडू (राष्ट्र की परम्परा)। सोमवार तड़के हुए भीषण नेपाल बस हादसा ने पूरे देश को…

3 hours ago