लखीमपुर खीरी में तेंदुए का आतंक: किसान की मौत, गन्ने के खेत में मिला अधखाया शव

लखीमपुर खीरी (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में रविवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई। धौरहरा वन रेंज के ग्राम दोंदरा पंडितपुरवा में तेंदुए के हमले में किसान मन्नालाल (35) की मौत हो गई। ग्रामीणों ने दोपहर बाद गन्ने के खेत में उनका अधखाया शव बरामद किया।

खेत में घास काटते समय हुआ तेंदुए का हमला

परिजनों के मुताबिक, मन्नालाल पड़ोसी गांव लोकईपुरवा निवासी शंकर के गन्ने के खेत में घास काटने गए थे। तभी झाड़ियों में छिपे तेंदुए ने अचानक उन पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि तेंदुआ किसान के पैर का मांस खाते हुए उसे खेत के भीतर घसीट ले गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

जब मन्नालाल दोपहर तक घर नहीं लौटे, तो परिजन और ग्रामीण उनकी तलाश में निकले। खोजबीन के दौरान खेत में उनका शव मिला। सूचना मिलने पर पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची।
धौरहरा रेंजर नृपेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है और वन विभाग की टीम लगातार गश्त कर रही है।

एक माह में चार लोगों पर तेंदुए के हमले

लखीमपुर खीरी में बीते कुछ महीनों से तेंदुओं की आबादी क्षेत्रों में बढ़ती आवाजाही ने दहशत फैला दी है। बीते एक महीने में चार लोगों पर तेंदुए ने हमला किया, जिनमें एक की मौत हो चुकी है।

4 अक्टूबर: ईसानगर क्षेत्र के खजुआ गांव में रमजान नामक किसान पर तेंदुए ने हमला किया।

23 सितंबर: रमियाबेहड़ क्षेत्र में मिश्रीलाल को तेंदुए ने घायल कर दिया।

10 सितंबर: नकहा के मजरा केवलपुरवा के पूर्व प्रधान प्रकाशचंद उर्फ मोतीलाल पर खेत में हमला हुआ।

अब 6 अक्टूबर को, मन्नालाल की मौत की खबर ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी है।

कई गांवों में फैला तेंदुए का खौफ

मझगई क्षेत्र के चौखड़ा फार्म, गनेशपुर, करनपुर, हरिहरपुर, सिंगाही, और महेवागंज इलाके में भी तेंदुए की मौजूदगी दर्ज की गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, तेंदुए ने अब तक दर्जनों पालतू कुत्तों और मवेशियों को मार डाला है। वन विभाग ने कुछ इलाकों में पिंजरा लगाकर पकड़ने की कोशिश की है, लेकिन अब तक तेंदुआ हाथ नहीं आया है।

विशेषज्ञों की राय

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में शिकार की कमी और खेतों में ऊँची फसलें (जैसे गन्ना) होने से तेंदुए इंसानी बस्तियों की ओर बढ़ रहे हैं। यह स्थिति मानव-वन्यजीव संघर्ष को बढ़ा रही है।

Karan Pandey

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