जो दिल से दूसरों का सम्मान करते हैं,
वह अपने सम्मान का ख़याल रखते हैं,
जो झुक कर किसी का मान करते हैं,
वो उसे झुकाकर खुद इज़्ज़त पाते हैं।
जो किसी से प्रेम करते हैं वह
उससे भी सच्चा प्रेम पाते हैं,
प्रेम में झुकना, सम्मान करना,
सकारात्मक भाव माने जाते हैं ।
किसी का भी सरल स्वभाव उसकी
कमज़ोरी नहीं, उसके संस्कार होते हैं,
ऐसे सरल स्वभाव के धनी सभी पर
सहजता के साथ विश्वास करते हैं।
ज़रा नादानों से भी थोड़ा रिश्ता रखो,
समय पे समझदारी काम नही आती,
पर ख़याल रखना कभी कभी चतुर
सयानी भी बड़ी नादानी बन जाती।
आदित्य सत्संगति जब मिल जाये,
उसका बेहतर प्रभाव हम पर पड़ता,
हम सब स्वयं भी सत्पुरुष बन पायें,
सत्संगति का असर हम पर पड़ता।
•कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
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