भक्तो के दुखों को दूर करते है जयराम ब्रह्मा बाबा मगराइचधाम वाले

गुणमूर्त है जयराम ब्रह्मा बाबा मगराइचधाम वाले

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) जनपद देवरिया तो देवो के पवित्र स्थलों में से एक है यहां भगवान श्रीपरशुरामजी ने विश्राम कर इस देवनगरी को और भी पवित्र कर दिया।जिस सरयू नदी को पार कर श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम कहलाते वहीं मां सरयू नदी देवभूमि देवरिया को पार कर अपने को धन्य होती है।यह वही देवभूमि है जहां बाबा राघव दास व ब्रह्मलीन योगीराज देवरहा बाबा अपने अलौकिक शक्तियों से अपने यश ख्याति का लोहा मनवाया।इस देवभूमि में देवी शक्ति व मां शक्तिपीठ सहित तमाम ब्रह्मलीन ब्रह्मदेव भी है। देवभूमि के इस पवित्र धरा पर एक गुणवर्त ब्रह्मा श्री जयराम बाबा मगराइचधाम वाले हैं।जो देवरिया जनपद मुख्यालय से महज ३०किमी दूरी पर खुखुन्दू के समीप स्थित है।यह ब्रह्म बाबा अपने अलौकिक शक्ति से अपने शरण आए सभी भक्तों को सुखी रखते हैं। उनके प्रधानपुजारी आचार्य अजय शुक्ला है जो बाबा के सेवा में अनवरत लगे रहते हैं और अपने भक्तों के कल्याणार्थ हेतु गुणवर्त ब्रह्म बाबा के सानिध्य में है। बाबा श्रीजयराम ब्रह्म की असीम कृपा अपने शिष्य पुजारी पर है।बाबा प्रधान पुजारी के माध्यम से प्रत्येक दुखीया भक्त का दुख समाप्त करते है यह गुणवर्त ब्रह्म जो आस्था से बाबा के शरण में आता है।वह सुखी हो जाता है।यह ब्रह्मलीन ब्रह्म अपने भक्तों के बीच रहते हैं व सर्व मार्गदर्शक है। बाबा स्वयं आत्म-स्थिति में रहते हुए, सब भक्त देहों में आत्मा ही को देखते। बाबा की ज्ञान-सभा में छोटे बच्चे भी बैठे होते, बूढ़े भी उपस्थित होते, ग्रामीण भी होते और बड़े-बड़े नगरों में ठाठ-बाट से रहने वाले भक्त भी विराजमान होते। परंतु बाबा सबको आत्मिक दृष्टि से देखते। यदि किसी अन्य उच्च वक्ता की सभा में छोटी आयु वाले बच्चे बैठे हों तो वह मन में सोचेगा कि ये बच्चे भला मेरी गहरी बातों को क्‍या समझेंगे? अथवा ये अत्यंत वृद्ध आयु वाले शक्तिहीन व्यक्ति मेरी इन अनमोल बातों को सुनकर क्या करेंगे? परन्तु बाबा तो यही देखते कि ये भी आत्माएँ हैं। किसी की कर्मेन्द्रियाँ छपी उपकरण अविकसित हैं किसी के जर्जरीभूत, परंतु इन आत्माओं का भी येन-केन-प्रकारेण कल्याण तो करना ही है। अत: वे ऐसे सरल, स्पष्ट, सुबोध और सरस तरीके से अत्यंत उच्च आध्यात्मिक सत्यों को दर्शाते कि बालक, वृद्ध, सभी उनको भली-भाँति समझकर कल्याण के भागी बनें, तभी तो वे सभा के बाद छोटे व बड़े, हरेक शरीरधारी आत्मा से अलग बैठ करके भी उसे ज्ञान-धन से लाभान्वित करते,रक्षा करते, उसे पितृवत स्नेह देते, भक्त के मन की उलझनों को दूर करते, उसे आत्मा तथा परमात्मा का बार-बार परिचय देते, भक्त के आदि-मध्य- अंत का हाल प्रधान पुजारी व अपने अनन्य भक्त के माध्यम से सुनाते और उसे यथायोग्य ईश्वरीय सेवा में लगाकर आत्मिक स्थिति में स्थित कर देते।ऐसे हैं श्री जयराम ब्रह्म मगराइचधाम वाले ब्रह्मलीन बाबा। इस स्थान पर भक्त दूर दूर से आते है और अपने दुखों से छुटकारा पाते है ।

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