Iran War Day 24: ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध के 24वें दिन वैश्विक हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump जो पहले ईरान को कड़ी चेतावनी दे रहे थे, अब नरम रुख अपनाते दिख रहे हैं। उन्होंने 5 दिन तक ईरान के पावर प्लांट और ऊर्जा ठिकानों पर हमला न करने की बात कही, जिसे आंशिक युद्धविराम के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
ईरान का हमला, इजरायल में तबाही
दूसरी ओर ईरान लगातार आक्रामक बना हुआ है।
Tel Aviv पर हुए हमलों में क्लस्टर बमों का इस्तेमाल किया गया, जिससे भारी तबाही मची और कई इलाकों में मलबा फैल गया।
क्यों बदला ट्रंप का रुख?
विशेषज्ञों के अनुसार ट्रंप के बदले रुख के पीछे कई कारण हैं:
• खाड़ी देशों (कतर, यूएई, बहरीन) की चेतावनी
• तेल की बढ़ती कीमतें
• वैश्विक दबाव और बाजार में अस्थिरता
• अमेरिका के भीतर बढ़ता विरोध
इन कारणों से अमेरिका अब सीधे टकराव के बजाय बातचीत का रास्ता तलाश रहा है।
मध्यस्थता की कोशिशें तेज
सूत्रों के मुताबिक Turkey, Pakistan और अन्य देश अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, ईरान ने सार्वजनिक रूप से किसी भी बातचीत से इनकार किया है और साफ किया है कि युद्ध उसकी शर्तों पर ही खत्म होगा।
क्या होगा ग्राउंड ऑपरेशन?
अमेरिका के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वह ईरान की जमीन पर सैनिक उतारेगा?
विशेषज्ञ मानते हैं कि:
• ईरान का भूगोल जटिल है
• जमीनी युद्ध बेहद कठिन होगा
• अमेरिकी सैनिकों के नुकसान का खतरा
• घरेलू और वैश्विक विरोध बढ़ सकता है
इसी कारण अमेरिका फिलहाल इस विकल्प से बचता नजर आ रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा फैक्टर
Strait of Hormuz इस पूरे संकट का केंद्र बना हुआ है।
यह मार्ग बंद होने से:
• वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित
• अंतरराष्ट्रीय बाजार में उथल-पुथल
• कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर
यही वजह है कि दुनिया के कई देश युद्ध खत्म कराने के लिए दबाव बना रहे हैं।
ट्रंप-नेतन्याहू रणनीति पर सवाल
इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और ट्रंप की रणनीति पर भी सवाल उठ रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक:
• ईरान में आंतरिक विद्रोह की उम्मीद गलत साबित हुई
• जनता सरकार के साथ खड़ी दिखी
• जंग लंबी और जटिल होती जा रही है
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